Table of Contents



Details Chapters and Sutras

  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 1
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – मिथ्यादर्शनाविरतिप्रमादकषाययोगा बन्धहेतवः ॥१॥मिथ्यादर्शन, अविरति, प्रमाद, कषाय और योग ये बन्ध के हेतु हैं ॥१॥ भावार्थ अर्थ : ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 2
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सकषायत्वाज्जीवः कर्मणो योग्यान्पुद्गलानादत्ते स बन्धः ॥२॥सूत्रार्थ– कषाय सहित होने से जीव कर्म के योग्य पुद्गलों ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 3
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – प्रकृतिस्थित्यनुभवप्रदेशास्तद्विधयः ॥३॥सूत्रार्थ– उसके प्रकृति, स्थिति, अनुभव और प्रदेश– ये चार भेद हैं ॥३॥ भावार्थ अर्थ : प्रकृति ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 4
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आद्यौ ज्ञानदर्शनावरणवेदनीयमोहनीयायुर्नामगोत्रान्तरायाः ॥४॥सूत्रार्थ– पहला अर्थात् प्रकृतिबन्ध ज्ञानावरण, दर्शनावरण, वेदनीय, मोहनीय, आयु, नाम, गोत्र और अन्तराय ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 5
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – पञ्चनवद्वयष्टाविंशतिश्चतुर्धीचत्वारिंशदद्विपञ्चभेदा यथाक्रमम् ॥५॥सूत्रार्थ– आठ मूल प्रकृतियों के अनुकूल में पाँच, नौ, दो, अट्ठाईस, चार, बयालीस, ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 6
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – मति-श्रुतावधि मन:पर्यय-केवलनाम् ॥६॥सूत्रार्थ– मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मन:पर्ययज्ञान और केवलज्ञान- इनको आवरण करनेवाली कर्म पाँच ज्ञानावरण ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 7
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – चक्षुरचक्षुरवधि-केवलानां निद्रा-निद्रानिद्रा-प्रचला-प्रचलाप्रचला-स्त्यानगृद्धश्च ॥७॥सूत्रार्थ– चक्षुदर्शन, अचक्षुदर्शन, अवधिदर्शन और केवलदर्शन – इन चारों के चार आवरण तथा ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 8
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सदसद्वेद्ये ॥८॥सूत्रार्थ– सद्वेद्य और असत्‍वेद्य– ये दो वेदनीय हैं ॥८॥ भावार्थ अर्थ : वेदनीय के दो भेद ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 9
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – दर्शनचारित्रमोहनीयाकषायकषायवेदनीयाख्यास्त्रिद्विनवषोडशभेदा: सम्यक्त्वमिथ्यात्वतदुभयान्यकषायकषायौ हास्यरत्यरतिशोक-भयजुगुप्सास्त्रीपुन्नपुंसकवेदा अनन्तानुबन्ध्यप्रत्याख्यान- प्रत्याख्यानसंज्वलनविकल्पाश्चैकशः क्रोधमानमायालोभा ॥९॥सूत्रार्थ– दर्शनमोहनीय, चारित्रमोहनीय, अकषायवेदनीय और कषाय वेदनीय– इनके क्रम ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 10
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – नारकतैर्यंग्योनमानुषदैवानि ॥१०॥सूत्रार्थ– नरकायु, तिर्यंचायु, मनुष्यायु और देवायु- ये चार आयु हैं ॥१०॥ भावार्थ अर्थ : नारक, तिर्यंच, ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 11
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – गति-जाति-शरीराङ्गोपाङ्-निर्माण-बन्धन-संघात-संस्थान-संहनन-स्पर्श-रस-गन्ध-वर्णानुपूर्वीगुरुलघुपघात-   परघातातातपोद्योतोच्छ्वास-विहायोगतयःप्रत्येकशरीर-त्रस-सुभग सुस्वर शुभ-सूक्ष्म-पर्याप्ती-स्थिरादेय-यशःकीर्ती-सेतराणी तीर्थंकरत्व च ॥११॥सूत्रार्थ– गति, जाति, शरीर, अंगोपांग, निर्माण, बन्धन, संस्थान, संहनन, ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 12
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – उच्चैर्नीचैश्च ॥१२॥सूत्रार्थ– उच्चगोत्र और नीचगोत्र- ये दो गोत्रकर्म हैं ॥१२॥ भावार्थ अर्थ : गोत्र कर्म के दो ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 13
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – दानलाभभोगोपभोगवीर्याणाम् ॥१३॥सूत्रार्थ– दान, लाभ, भोग, उपभोग और वीर्य- इनके पाँच अन्तराय हैं ॥१३॥ भावार्थ अर्थ : दानान्तराय, ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 14
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आदितस्तिसृणामन्तरायस्य च त्रिंशत्सागरोपमकोटीकोट्यः परा स्थिति: ॥१४॥सूत्रार्थ– आदि की तीन प्रकृतियाँ अर्थात् ज्ञानावरण, दर्शनावरण और वेदनीय ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 15
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सप्ततिर्मोहनियस्य ॥१५॥सूत्रार्थ– मोहनीय की उत्कृष्ट स्थिति सत्तर कोटाकोटी सागरोपम है ॥१५॥ भावार्थ अर्थ : मोहनीय कर्म की ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 16
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – विंशतिर्नामगोत्रयोः ॥१६॥सूत्रार्थ– नाम और गोत्र की उत्कृष्ट स्थिति बीस कोटाकोटी सागरोपम है ॥१६॥ भावार्थ अर्थ : नाम ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 17
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – त्रयस्त्रिंशत्सागरोपमाण्यायुषः ॥१७॥सूत्रार्थ– आयु की उत्कृष्ट स्थिति तैंतीस सागरोपम है ॥१७॥ भावार्थ अर्थ : आयु कर्म की उत्कृष्ट ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 18
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अपरा द्वादशमुहूर्ता वेदनीयस्या ॥१८॥सूत्रार्थ– वेदनीय की जघन्य स्थिति बारह मुहूर्त है ॥१८॥ भावार्थ अर्थ : वेदनीय कर्म ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 19
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – नामगोत्रयोरष्टौ ॥१९॥सूत्रार्थ– नाम और गोत्र की जघन्य स्थिति आठ मुहूर्त है ॥१९॥ भावार्थ अर्थ : नाम और ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 20
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – शेषाणामनन्तमुहूर्ताः ॥२०॥सूत्रार्थ– बाकी के पाँच कर्मों की जघन्य स्थिति अन्तर्मुहूर्त है ॥२०॥ भावार्थ अर्थ : ज्ञानावरण, दर्शनावरण, ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 21
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – विपाकोऽनुभवः ॥२१॥सूत्रार्थ– विपाक अर्थात् विविध प्रकार के फल देने की शक्ति का पड़ना ही अनुभव ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 22
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – स यथानाम ॥२२॥सूत्रार्थ– वह जिस कर्म का जो जैसा नाम है, उसके अनुरूप होता है ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 23
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – ततश्च निर्जरा ॥२३॥सूत्रार्थ– इसके बाद निर्जरा होती है ॥२३॥ भावार्थ अर्थ : फल दे चुकने पर कर्म ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 24
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – नामप्रत्ययाः सर्वतो योगविशेषात्सूक्ष्मैकक्षेत्रावगाहस्थितः सर्वात्मप्रदेशेष्वनन्तानन्तप्रदेशाः ॥२४॥सूत्रार्थ– कर्म प्रकृतियों के कारणभूत प्रति समय योग विशेष के विशेष ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 25
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सद्वेदयशुभायुर्नामगोत्राणि पुण्यम् ॥२५॥सूत्रार्थ– साता वेदनीय, शुभ आयु, शुभ नाम और शुभ गोत्र- ये प्रकृतियाँ पुण्यरूप ...
  • 01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 26
    Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अतोऽन्यत्पापम् ॥२६॥सूत्रार्थ– इनके सिवा शेष सब प्रकृतियाँ पापरूप हैं ॥२६॥ भावार्थ अर्थ : इन पुण्य कर्म प्रकृतियों ...