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Acharya Shri Umaswati
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परात्मनिन्दा-प्रशंसे सदसद्गुणोच्छादनोभ्दावने च नीचैर्गोत्रस्य ॥२५॥
सुत्रार्थ- परनिन्दा, आत्मप्रशंसा, सद्गुणों का उच्छादन और असदगुणों का उद्भावन – ये नीच गोत्र के आश्रव हैं ॥२५॥




भावार्थ

अर्थ: दूसरों की निंदा करना, अपनी प्रशंसा करना, दूसरों के मौजूदा गुणों को भी ढाँकना और अपने में गुण नहीं होते हुए भी उनको प्रकट करना, ऐसे भावों से नीच गोत्र का आश्रव होता है ॥२५॥
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

Censuring others, praising oneself, concealing good qualities present in others and proclaiming noble qualities absent in oneself, cause the influx (āsrava) of karmas which lead to low-status (nīcagotra).
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: अब आत्मा शब्द का अर्थ कहते हैं। ‘अत्’ धातु निरन्तर गमन करने रूप अर्थ में है और सब गमनार्थक धातु ज्ञानात्मक अर्थ में ही होती है, इस वचन से यहाँ पर गमन शब्द से ज्ञान कहा जाता है। इस कारण जो यथासंभव ज्ञान, सुख आदि गुणों में सर्व प्रकार वर्तता है वह आत्मा है। अथवा शुभ-अशुभ मन-वचन-काय की क्रिया के द्वारा यथासम्भव तीव्र-मन्द आदि रूप से जो पूर्णरूपेण वर्तता है वह आत्मा है। अथवा उत्पाद-व्यय और ध्रौव्य इन तीनों धर्मो के द्वारा जो पूर्ण रूप से वर्तता है वह आत्मा है। द्वादशांग का नाम आत्मा हैं, क्योंकि वह आत्मा का ही परिणाम है और परिणाम परिणामी से भिन्न नहीं होता क्योंकि मिट्टी द्रव्य से पृथक्भूत कोई घट पर्याय नहीं पायी जाती। यहाँ द्रव्य श्रुत को आत्मा नहीं समझना चाहिए क्योंकि वह आत्मा का धर्म नहीं है। उसे जो आगम संज्ञा प्राप्त है, वह उपचार से है। वास्तव में वह आगम नहीं है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-२-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

उत्तर: दूसरों के विद्यमान और अविद्यमान दोषों को प्रकट करने की इच्छा मानसिक परिणाम अथवा अवक्षेप निन्दा कहलाती है। स्वयं के सद्भूत अथवा असद्भूत गुणों के प्रकाशन करने की इच्छा या अभिप्राय प्रशंसा कही जाती है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-२-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 04 March 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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