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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
परे मोक्षहेतू ॥२९॥
Meaning
जो चार प्रकार के ध्यान कहे उनमें से अन्त के दो अर्थात् धर्म्यध्यान और शुक्लध्यान  मोक्ष के कारण हैं।॥२९॥

भावार्थ

 (परे) अन्त के धर्म्य और शुक्ल ध्यान (मोक्ष हेतू) मोक्ष के कारण (स्तः) हैं। धर्म्यध्यान परम्परा से और शुक्लध्यान साक्षात् मोक्ष का कारण है। आर्त्त और रौद्र ध्यान संसार के कारण हैं।Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

English Meaning:

The last two subdivisions of meditation – dhyāna – are the causes of liberation (moksa). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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ध्यान
flowchart TB

A["ध्यान"]

A --> B["अप्रशस्त"]
A --> C["प्रशस्त"]

B --> B1["✻ पापास्रव का कारण<br> ✻ दुःध्यान"]


B1 --> B3["आर्त<br>पीड़ा का चिन्तन"]
B1 --> B4["रौद्र<br>पाप में आनंद<br>(क्रूर आशय)"]

B3 --> B5["संसार के कारण"]
B4 --> B5

C --> C1["✻ कर्मों के नाश का कारण<br>✻ सुध्यान"]


C1 --> C3["धर्म्य<br>धर्म से युक्त परिणाम"]
C1 --> C4["शुक्ल<br>शुद्ध परिणाम"]

C3 --> C5["परम्परा"]
C4 --> C6["साक्षात"]

C5 --> C7["मोक्ष के कारण"]
C6 --> C7

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer केवल एक में ही परत्व होता है ऐसा नहीं है, अपितु व्यवहित में भी पर शब्द का प्रयोग होता है। जैसे-मथुरा पाटलिपुत्र से परे है, अथवा द्विवचन का निर्देश होने से अन्तिम शुक्ल और उसके समीपवर्ती धर्मध्यान का पर शब्द से ग्रहण होता है, क्योंकि समीपवर्ती अन्य को भी ‘पर’ कहते हैं ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer ‘परे मोक्षहेतू’ धर्म्यध्यान और शुक्लध्यान मोक्ष के कारण हैं ऐसा कहने पर संमोहत्व हेतु से परिशेष न्याय द्वारा पूर्व के आर्त्त और रौद्रध्यान संसार के कारण हैं, यह जाना जाता है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 11-Mar-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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