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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
सचित्तसम्बन्धसंमिश्राभिषवदुः पक्वाहाराः ॥३५॥
Meaning
सचित्ताहार, सचित्तसम्बन्धाहार, सचित्तमिश्राहार, अभिषव तथा दुःपक्वाहार ये उपभोग- परिभोग परिसंख्यान व्रत के पाँच अतिचार हैं॥३५॥

भावार्थ

सचित्त आहार ( सचेतन पुष्प पत्र फल वगैरह का खाना ), सचित्त संबंध आहार (सचित्त से संबंधित वस्तु को खाना ), सचित्त सम्मिश्र आहार (सचित्त से मिली हुई वस्तु को खाना ), अभिषव आहार (इन्द्रियों को मंद करने वाली वस्तु को खाना ), दुष्पक्वाहार ( ठीक रीत से नहीं पके हुए भोजन को करना), ये पाँच भोगोपभोग परिमाण व्रत के अतिचार हैं। इस तरह का आहार करने से इन्द्रियाँ प्रबल हो सकती हैं, शरीर में रोग हो सकता है, जिससे उपभोग परिभोग के किये हुए परिमाण में व्यतिक्रम होने की संभावना है ।। ३५ ॥ Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

Taking victuals (āhāra) containing (one-sensed) organisms – sacitta, placed near organisms – sambandha, mixed with organisms – sammiśra, stimulants – abhiṣava, and ill-cooked – duspakva, are the five transgressions of the supplementary vow of limiting consumable and non-consumable things – upabhoga- paribhogapaimāṇavrata. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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उपभोग परिभोग परिमाण व्रत
flowchart TB

A["उपभोग परिभोग परिमाण व्रत"]

A --> B["(सभी आहार से सम्बंधित)"]

B --> C["सचित (चेतना सहित पदार्थ)"]
B --> F["अभिपवाचार"]
B --> G["दुःपवाचार"]

C --> D["आहार <br> * जैसे- कच्चे फल, फूलादि"]
C --> E["संवंधाहार <br> * से सम्बन्ध प्राप्त हुआ आहार"]
C --> H["सम्मिश्राहार <br> * से मिश्रित हुआ आहार"]

F --> I["* गरिष्ठ आहार"]

G --> J["* अधपका, अधिक पका आहार"]

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer उपभोग- परिभोग व्रत के पाँच अतिचार हैं- (१) सचित्ताहार (२) सचित्तसम्बन्धाहार ( ३ ) सचित्तसंमिश्राहार (४) अभिषव’ (५) दु:पक्वाहार । (१) विषय रूपी विष से उपेक्षा नहीं होना (२) भोगे हुए विषयों का बार-बार स्मरण करना (३) अतिलौल्य (वर्तमान विषयों में अतिलम्पटता रखना) (४) अतितृषा ( आगामी विषयों की अधिक तृष्णा रखना (५) अतिअनुभव, वर्तमान विषय का अत्यन्त आसक्ति से अनुभव करना ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer सचित्त सम्बन्ध में केवल संसर्ग विवक्षित है तथा सचित्त संमिश्र में सूक्ष्म जन्तुओं से आहार ऐसा मिला होता है जिसका विभाग करना अशक्य होता है। अर्थात् मिली हुई, एकमेक हुई वस्तु को संमिश्र कहते हैं या नानाजातीय द्रव्यों का समाहार (समूह) सूक्ष्म जन्तुओं से मिला हुआ आहार जिसमें गर्भित है, वह सचित्त संमिश्र आहार है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 6-Mar-2026

Courtesy:
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