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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
ज्ञान-दर्शन- चरित्रोपचाराः ॥ २३ ॥
Meaning
ज्ञानविनय, दर्शनविनय, चारित्रविनय और उपचारविनय – ये विनय तप के चार भेद हैं॥ २३ ॥

भावार्थ

ज्ञान विनय, दर्शन विनय, चारित्र विनय और उपचार विनय ये चार भेद विनय के हैं। आलस्य त्यागकर आदरपूर्वक सम्यग्ज्ञान का ग्रहण करना, अभ्यास करना आदि ज्ञान विनय है । तत्त्वार्थ का शङ्का आदि दोष रहित श्रद्धान करना दर्शन विनय है । अपने मन को चारित्र के पालन में लगाना चारित्र विनय है । और आचार्य आदि पूज्य पुरुषों को देखकर उनके लिए उठना, सन्मुख जाकर हाथ जोड़कर वंदना करना तथा परोक्ष में भी उन्हें नमस्कार करना, उनके गुणों का स्मरण वगैरह करना, उनकी आज्ञा का पालन करना, ये सब उपचार विनय है ॥ २३ ॥Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

The four subdivisions of reverence – vinaya – are reverence to knowledge – jñānavinaya, faith – darśanavinaya, conduct-cāritravinaya, and the custom of homage – upacāravinaya. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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विनय
flowchart TB

A["विनय"]

A --> B["ज्ञान"]
A --> C["दर्शन"]
A --> D["चारित्र"]
A --> E["उपचार"]

B --> B1["ज्ञान का ग्रहण, अभ्यास, स्मरण"]

C --> C1["तत्त्वार्थ श्रद्धान"]

D --> D1["निर्दोष चारित्र का पालन"]

E --> E1["पूज्य पुरुषों के प्रति समुचित व्यवहार"]

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer द्वादशांग और चतुर्दश पूर्वों को कालशुद्धि से पढ़ना, व्याख्यान करना अथवा परिवर्तन फेरना काल विनय है ।  सदोष कालों को छोड़कर श्रेष्ठ स्वाध्याय करना चाहिए तथा आगम का पाठ आदि भी शुभ काल में ही करना चाहिए।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer मुनिजन जो पर्यंकासन, अर्द्धपर्यंकासन, वीरासन आदि में से एक आसन लगाकर हाथों को शुद्धकर, सिद्धान्त सूत्रोंको ही नमस्कार कर तथा उन्हीं को हृदय में विराजमान कर मन, वचन, काय की शुद्धता पूर्वक जो सूत्र वा सूत्र के अर्थ को पढ़ते हैं उसको ज्ञान का विनय अथवा विनयाचार कहते हैं।  द्वादशांग आदि ग्रन्थों का हाथ-पैर धोकर पर्यंकासन से बैठकर अध्ययन करना विनय शुद्धि नाम का ज्ञानविनय है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 10-Mar-2026

Courtesy:
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