
Acharya Shri Umaswati
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Sutra
नवचतुर्दशपञ्चद्विभेदा यथाक्रमं प्राग्ध्यानात् ॥२१॥
Meaning
ध्यान से पहले-पहले क्रमशः उन प्रायश्चित्तादि तपों के नौ, चार, दस, पाँच और दो भेद है। ॥ २१ ॥


भावार्थ
प्रायश्चित के नौ भेद हैं। विनय के चार भेद हैं। वैयावृत्तय के दस भेद हैं। स्वाध्याय के पाँच भेद हैं और व्युत्सर्ग के दो भेद हैं। इस तरह ध्यान से पहले पाँच प्रकार के तपों के ये भेद हैं ॥ २१ ॥Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
English Meaning:
Prior to meditation (dhyāna), these (internal austerities) are of nine, four, ten, five, and two kinds, respectively. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
आभ्यंतर तप
| आभ्यंतर तप | ||||||
|---|---|---|---|---|---|---|
| नाम | प्रायश्चित | विनय | वैयावृत्य | स्वाध्याय | व्यूत्सर्ग | ध्यान |
| स्व-रूप | – प्रमाद से लगे दोषों को दूर करना | – ज्ञानी का बहुमान – पूज्य पुरुषों का आदर | अन्य मुनियों की संयम साधना के निमित्त सेवा करना | ज्ञान की आराधना करना | अहंकार-ममकार का त्याग | चित्त की चंचलता का त्याग |
| भेद | 9 | 4 | 10 | 5 | 2 | 4 |
| लाभ | – दोषों का शोधन – मर्यादा में रहना – भावों में उज्ज्वलता | – ज्ञान की प्राप्ति – आचार की विशुद्धता – सम्यक आराधना की सिद्धि | – समाधि की प्राप्ति – ग्लानि का अभाव – प्रवचन में वात्सल्य | – बुद्धि में अतिशय प्रकट होना – संशय दूर होना – अतिचारों में विशुद्धि – संसारिक सेविरक्ता | – निःसंगता – निर्भीकता – जीवित रहने की आशा का अभाव | कर्मों का क्षय |
Questions and Answers: शङ्का -समाधान
Answer सूत्र में दिये गये ‘यथाक्रमं ‘ पद का प्रायश्चित्त नौ प्रकार का, विनय चार प्रकार का, वैयावृत्त्य दस प्रकार का, स्वाध्याय पांच प्रकार का एवं व्युत्सर्ग दो प्रकार का है, ऐसा सम्बन्ध होता है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
Answer सूत्र में दिये गये ‘प्राग्ध्यानात्’ पद का अर्थ यह है कि ध्यान के विषय में बहुत कुछ कहना है इसलिए उसका कथन आगे करेंगे।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
- Tatvartha_Sutra_Muni_Sudhasagarji_तत्वार्थसूत्रमुनिसुधासागर_जी
- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 10-Mar-2026
Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project
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