Table of Contents

Acharya Shri Umaswati
Read About Acharya Umaswami
here


Sutra
वाङ्मनोगुप्तीर्यादाननिक्षेपणसमित्यालोकितपानभोजनानि पञ्च ॥४॥
Meaning
वाग्गुप्ति, मनोगुप्ति, ईर्यासमिति, आदाननिक्षेपणसमिति और आलोकितपानभोजन ये पांच अहिंसाणुव्रत की भावनाएँ हैं।
॥४॥

भावार्थ

वाग्गुप्ति, मनोगुप्ति, ईर्यासमिति, आदाननिक्षेपणसमिति और आलोकितपानभोजन ये पांच अहिंसाणुव्रत की भावनाएँ हैं। वाग्गुप्ति – वचन की प्रवृत्ति का रोकना । मनोगुप्ति – मन की प्रवृत्ति का रोकना । ईर्यासमिति – चलते समय आगे की चार हाथ जमीन देखने का लक्ष्य रखना । आदाननिक्षेपणसमिति – वस्तु को रखते उठाते समय जीवरक्षा का ध्यान आलोकितपानभोजन – भोजन पान ग्रहण करते समय देखने और शोधने का ध्यान रखना । तथा दिन के प्रकाश में भोजन करना । Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

English Meaning:

Control of speech – vacanagupti, control of thought- manogupti, regulation of movement – īryāsamiti, care in taking and placing things or objects – ādānanikṣepana- samiti, and examining food and drink – ālokitapāna- bhojana, are the five observances (bhāvanā) for the vow of non-injury (ahimsā). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


अहिंसा व्रत की भावनाएँ
flowchart TB

A["अहिंसा व्रत की भावनाएँ"]

A --> B["गुप्ति (निवृत्ति)"]
A --> C["समिति (यत्नाचार प्रवृत्ति)"]

%% गुप्ति Section
B --> B1["वचनगुप्ति"]
B --> B2["मनोगुप्ति"]

B1 --> B1a["वचन को भले प्रकार रोकना"]
B2 --> B2a["मन को भले प्रकार रोकना"]

%% समिति Section
C --> C1["ईर्यासमिति"]
C --> C2["आदान-निक्षेपण"]
C --> C3["आलोकित पानभोजन"]

C1 --> C1a["चार हाथ आगे की जमीन देख कर चलना"]
C2 --> C2a["सावधानीपूर्वक उठाना-रखना"]
C3 --> C3a["देख-शोधकर सूर्य के प्रकाश में भोजन करना"]

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer वचन गुप्ति, मनोगुप्ति, ईर्ष्या समिति, आदान-निक्षेपण समिति और आलोकितपान- भोजन, ये अहिंसाव्रत की पाँच भावनाएं हैं।  एषणासमिति, आदाननिक्षेपणसमिति, ईर्ष्यासमिति, मनोगुप्ति और आलोकितपान – भोजन, ये अहिंसाव्रत की पाँच भावनाएँ हैं ( मू.प्र. ११८-११९) मनोगुप्ति, वचनगुप्ति, ईर्ष्या समिति, कायनियन्त्रण और विष्वाण समिति ये अहिंसाव्रत की पाँच भावनाएं हैं ( म.पु. २० / १६१) सुवाग्गुप्ति, सुमनोगुप्ति, स्वकालेवीक्ष्यभोजन, ईर्ष्यासमिति और आदान- निक्षेपण समिति ये अहिंसाव्रत की पाँच भावनाएं हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer अहिंसाव्रत की शुद्धि के लिए मेरे वचन गुप्ति और मनोगुप्ति होवे तथा ईर्ष्या समिति, आदान-निक्षेपण समिति और दिन में देख शोध कर भोजन करने की क्रियायें होवें, इस प्रकार चित्त में बार- बार चिंतन करने से भावित आत्मा व्रतों में दृढ़ होती है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 3-Mar-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



All Chapters