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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
 स्तेनप्रयोगतदाहृतादानविरुद्धराज्यातिक्रमहीनाधिक-
हीनाधिकमानोन्मान-प्रतिरूपकव्यवहाराः ॥२७॥
Meaning
स्तेन प्रयोग, तदाहृतादान, विरुद्ध – राज्यातिक्रम, हीनाधिक- मनोन्मान और प्रतिरूपक-व्यवहार ये पाँच अचौर्याणुव्रत के अतिचार हैं॥२७॥

भावार्थ

चोर को चोरी करने की स्वयं प्रेरणा करना, दूसरे से प्रेरणा करवाना, करता हो तो उसकी सराहना करना, स्तेन प्रयोग है। जिस चोर को चोरी करने की न तो प्रेरणा ही की और न अनुमोदना ही की, ऐसे किसी चोर से चोरी का माल खरीदना तदाहृतादान है। राज नियम के विरुद्ध चोर बाजारी वगैरह करना विरुद्ध राज्यातिक्रम है। तोलने के बाँटों को मान कहते हैं और तराजू को उन्मान कहते हैं । बाट तराजू दो तरह के रखना, कमती से दूसरों को देना और अधिक से स्वयं लेना हीनाधिक मानोन्मान है । जाली सिक्के ढालना अथवा खरी वस्तु में खोटी वस्तु मिलाकर बेचना प्रतिरूपक व्यवहार है। ये पाँच अचौर्याणुव्रत के अतिचार हैं Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

Prompting another to steal – stenaprayoga, receiving stolen goods – stena āhṛtādāna, buying against the law – viruddharajyatikrama, using false weights and measures – hīnādhikamānonmāna, and deceiving others with artificial or imitation goods – pratirūpakavyavahāra, are the five transgressions of the third minor vow of non- stealing (acauryāṇuvrata). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


अचौर्याणुव्रत
स्तेन प्रयोगस्तेन
आह्वादान
विरुद्ध
राज्यतिक्रम
हीनाधिक
मानोमान
प्रतिरूपक
व्यवहार
किसी को चोरी के लिए प्रेरित करना, कराना व अनुमोदना करनाचोरी की वस्तु का ग्रहणराज्य आज्ञा के विरुद्ध चलनालेने के व देने के माप कम-ज्यादा रखनाउत्तम वस्तु में खोटी मिलाकर अच्छी कहकर बेचना

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer चोरी करने वाले को स्वयं प्रयोग बतलाना वा दूसरे के द्वारा उसको चोरी में प्रयुक्त प्रवृत्त करना और उस चोरी की वा चोर की मन से प्रशंसा करना, चोरी करना अच्छा मानना, ये सब स्तेनप्रयोग  हैं। किसी को चोरी के लिए स्वयं प्रेरित करना या दूसरे के द्वारा प्रेरित कराना या प्रयुक्त हुए की अनुमोदना करना स्तेनप्रयोग है।चोर को त्रिधा चोरी में प्रयुक्त करना स्तेनप्रयोग है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer अपने द्वारा जिसके उपाय नहीं बताये गये हैं और न जिसकी अनुमोदना ही की है ऐसे चोर के, चोरी करके लाये हुए द्रव्य को खरीदना तदाहृतादान है। अपने द्वारा अप्रयुक्त असम्मत चोर द्वारा लायी हुई वस्तु को ले लेना तदाहृतादान है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 5-Mar-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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