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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
अनुग्रहार्थं – स्वस्यातिसर्गो दानम् ॥ ३८ ॥
Meaning
स्व और पर के उपकार के लिए अपने धन का त्याग करना दान है
॥ ३८ ॥

भावार्थ

अपने और दूसरों के उपकार के लिए धन वगैरह का देना सो दान है। अर्थात् दान देने से दाता को पुण्य बंध होता है और जिसे दान दिया जाता है उस पात्र के धर्म साधन में उससे सहायता मिलती है। इन्हीं दो भावनाओं से दिया गया दान वास्तव में दान है Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

Charity (dāna) is the giving of one’s objects to another for mutual benefit – anugraha. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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दान
flowchart TD

A["दान <br> (उपकार के लिए स्व की वस्तु का त्याग)"]

A --> B["स्व का उपकार"]
A --> C["पर का उपकार"]

B --> B1["लोभ वृत्ति कम होती है"]
B --> B2["आत्मा त्याग की तरफ झुकता है"]
B --> B3["पुण्यबंध होता है"]

C --> C1["जीवन यात्रा में मदद"]
C --> C2["धर्म साधना में सहायता"]

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer  यहाँ शिष्य कहता है कि आपने तीर्थंकर प्रकृति के आस्रव के कथन में ‘शक्ति अनुसार त्याग’ ‘शक्ति अनुसार तप’ बताया है तथा सात प्रकार के शीलव्रतों के वर्णन में भी अतिथिसंविभाग कहा है जिसका दूसरा नाम दान है परन्तु दान का लक्षण कहीं पर भी नहीं कहा, उस दान का लक्षण कहने के लिए यह सूत्र कहा गया है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer ‘स्व’ शब्द धन का पर्यायवाची है। स्व शब्द के आत्मा, आत्मीय जाति, धन आदि अनेक अर्थ होते हैं, परन्तु यहाँ पर ‘स्व’ शब्द का अर्थ ‘धन’ का पर्यायवाचक ग्रहण करना चाहिए। स्व पर का अनुग्रह करने के लिए धन का त्याग करना दान है।  रत्नत्रय से युक्त जीवों के लिए अपने वित्त का त्याग करने या रत्नत्रय के योग्य साधनों के प्रदान करने की इच्छा का नाम दान है। सात गुणों सहित और कौलिक (कुल सम्बन्धी), आचरणिक तथा शारीरिक शुद्धि से सहित दाता के द्वारा सूना रहित गृह सम्बन्धी कार्य तथा खेती आदि के आरम्भ से रहित सम्यग्दर्शनादि गुणों से सहित मुनियों का नवधा भक्ति पूर्वक जो आहारादि के द्वारा गौरव किया जाता है वह दान माना जाता है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



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Diksha Jain created this page on 6-Mar-2026

Courtesy:
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