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Acharya Shri Umaswati
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आद्यौ ज्ञानदर्शनावरणवेदनीयमोहनीयायुर्नामगोत्रान्तरायाः ॥४॥
सूत्रार्थ– पहला अर्थात् प्रकृतिबन्ध ज्ञानावरण, दर्शनावरण, वेदनीय, मोहनीय, आयु, नाम, गोत्र और अन्तराय रूप हैं ॥४॥




भावार्थ

अर्थ : प्रकृति बंध के ज्ञानावरण, दर्शनावरण, वेदनीय, आयु, नाम, गोत्र और अन्तराय ये आठ भेद हैं ॥४॥
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

The nature-bondage (prakrtibandha) is of eight kinds: knowledge-obscuring – jñānāvarana, perception- obscuring – darśanāvarana, feeling-producing – vedanīya, deluding – mohanīya, life-determining – āyuh, name- determining or physique-making – nāma, status- determining – gotra, and obstructive – antarāya.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: जो जीव को परतंत्र करते हैं, अथवा जीव जिनके द्वारा परतंत्र किया जाता है, उन्हें कर्म कहते हैं। अथवा जीव के द्वारा मिथ्यादर्शनादि परिणामों से जो किये जाते हैं– उपार्जित होते हैं वे कर्म हैं। जो लोक की अनेकरूपता के मूल रूप से हेतु हैं उन्हें कर्म कहते हैं। विधि, सष्टा, विधाता, देव, पुराकृत, कर्म और ईश्वर ये कर्म के ही पर्यायवाचक नाम हैं। मधुर एवं कटू फल प्रदाता होने से इन्हें द्विविध (पुण्य-पाप) रूप भी कहा गया है तथा यह भी बताया गया है कि अपने कर्मों के अनुसार जीव को उसके शुभाशुभ फल भोगने पड़ते हैं। ये तब तक जीव के साथ कर्म हैं तब तक उसके मिथ्यात्व,  अविरति, प्रमाद, कषाय और योग का सद्भाव रहता है। इन कर्मों की निर्जरा का साधन तप है। ध्यानाग्नि से इनके भस्मीभूत होने पर परमपद की प्राप्ति होती है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-२-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

उत्तर : जो आवृत करता है या जिसके द्वारा आवृत किया जाता है वह आवरण कहलाता है। जो ज्ञान का आवरण करता है वह ज्ञानावरण है। बहिरंग पदार्थों को विषय करने वाले उपयोग का प्रतिबन्धक ज्ञानावरण कर्म है, ऐसा जानना चाहिए। ज्ञानस्वरूप जीव के ज्ञान को रोकने वाला ज्ञानावरणीय प्रथम कर्म है। प्रवाह रूप से अनादि बन्धन बद्ध ज्ञान का आवरण करने वाला पुद्गल स्कंध ज्ञानावरणीय कर्म कहलाता है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-२-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 5-Mar-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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