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Acharya Shri Umaswati
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भेद- संघातेभ्य उत्पद्यन्ते ॥२६॥
सूत्रार्थ – भेद से, संघात से तथा भेद और संघात दोनों से स्कन्ध उत्पन्न होते हैं ।।२६।।


भावार्थ

अर्थ : भेद, संघात और भेद संघात से स्कन्धों की उत्पत्ति होती है। स्कन्धों के टूटने को भेद कहते हैं। भिन्न-भिन्न परमाणुओं या स्कन्धों के मिलकर एक हो जाने को संघात कहते हैं। जैसे दो परमाणुओं के मिलने से द्विप्रदेशी स्कन्ध बनता है। इसी तरह तीन, चार, संख्यात, असंख्यात और अनन्त परमाणुओं के मेल से उतने ही प्रदेशी स्कन्ध बनता है। तथा एक स्कन्ध में दूसरे स्कन्ध के मिलने या अन्य परमाणुओं के मिलने से भी स्कन्ध बनता है। इन्हीं स्कन्धों के टूटने से भी दो प्रदेशी स्कन्ध तक स्कन्धों की उत्पत्ति होती है। इसी तरह एक स्कन्ध के टूटकर दूसरे स्कन्ध में मिल जाने से भी स्कन्ध की उत्पत्ति होती है ।।२६।।
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

Molecules (skandha) are formed by fission (bheda), fusion (sanghata) and division-cum-union (bheda-sanghata).
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: तीन का संग्रह करने के लिए सूत्र में बहु वचन का निर्देश किया है। जिससे यह अर्थ सम्पन्न होता है कि भेद से, संघात से और भेद – संघात, इन दोनों से स्कन्ध उत्पन्न होते हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

उत्तर : यदि पुद्गल की परमाणु और स्कन्ध रूप पर्यायें उत्पन्न होने से सादिमान् हैं तो बताइये- वे पर्यायें किसके निमित्त से उत्पन्न होती हैं अतः स्कन्धों की उत्पत्ति का प्रतिपादन करने के लिए यह सूत्र कहा गया है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



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Diksha Jain created this page on 12-feb-2026

Courtesy:
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