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Acharya Shri Umaswati
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परस्परोपग्रहो जीवानाम् ॥२१॥
सूत्रार्थ – परस्पर निमित्त होना- यह जीवों का उपकार है ।।२१।।

भावार्थ

अर्थ : आपस में एक दूसरे की सहायता करना जीवों का उपकार है। जैसे स्वामी धन वगैरह के द्वारा अपने सेवक का उपकार करता है और सेवक हित की बात कहकर और अहित से बचाकर स्वामी का उपकार करता है । इसी तरह गुरु उचित उपदेश देकर शिष्य का उपकार करता है और शिष्य गुरु की आज्ञा के अनुसार आचरण करके गुरु का उपकार करता है। उपकार का प्रकरण होते हुए भी इस सूत्र में जो उपग्रह पद दिया है वह यह बतलाने के लिए दिया है कि पहले सूत्र में बतलाए गए सुख – दुःख आदि भी जीवकृत उपकार हैं। अर्थात् एक- दूसरे जीव को सुख-दुःख भी देता है और जीवन मरण में भी सहायक होता है ॥२१॥
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

The function of the souls (jīva) is to help one another.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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जीव का उपकार
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Video Pravachans

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: स्वामी – नौकर, आचार्य शिष्य आदि भाव से जो वृत्ति होती है, उसको परस्पर उपग्रह कहते हैं, जैसे स्वामी अपने धन का त्याग करके सेवक का उपकार करता है और सेवक स्वामी के हित प्रतिपादन और अहित के प्रतिषेध द्वारा उसका उपकार करता है। आचार्य उभयलोक हितकारी मार्ग दिखाकर तथा हितकारी क्रिया का अनुष्ठान कराकर शिष्यों का उपकार करते हैं और शिष्य गुरु से उपकार करते हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

उत्तर : चारों अजीव द्रव्यों का दूसरे का उपग्रह जैसे सान्ततिक है, क्या इसी प्रकार आत्मा के भी पर का उपकारत्व है अथवा कोई दूसरी विधि है, ऐसा पूछने पर आचार्य महाराज ने यह सूत्र कहा है। ( रा. वा. उ. २१) इस प्रकार पहले अजीवकृत उपकार को दिखाकर अब जीवकृत उपकार को दिखाने के लिए यह सूत्र कहा गया है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



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Diksha Jain created this page on 12-feb-2026

Courtesy:
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