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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
अवीचारं द्वितीयम् ।।४२।।
Meaning
 द्वितीय शुक्लध्यान वीचार रहित है॥४२॥

भावार्थ

किन्तु दूसरा शुक्ल ध्यान वीचार रहित है। अर्थात् पहला शुक्ल ध्यान तो वितर्क और वीचार दोनों से सहित है । किन्तु दूसरा शुक्ल ध्यान वितर्क से सहित है पर वीचार से रहित है ॥ ४२ ॥Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

The second type – ekatvavitarka – is free from shifting (vīcāra). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer उन दोनों ध्यानों में ऐसा क्रमवर्ती अर्थ नहीं ग्रहण किया जाय कि सवितर्क पहला शुक्लध्यान होता है और सवीचार दूसरा शुक्लध्यान होता है, इस अनिष्ट क्रम की निवृत्ति के लिए यह सूत्र कहा है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer पूर्व के दो ध्यानों में जो पूर्व है वह प्रथम है और द्वितीय शेष है। वह द्वितीय शुक्लध्यान में वितर्क तो है परन्तु वीचार से रहित है, ऐसा जानना चाहिए परन्तु पहला शुक्लध्यान वितर्क और वीचार सहित है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 12-Mar-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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