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तत्वार्थसूत्र-TatvarthSutra-Chapter-8A collection of 26 posts

01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 14

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – आदितस्तिसृणामन्तरायस्य च त्रिंशत्सागरोपमकोटीकोट्यः परा स्थिति: ॥१४॥सूत्रार्थ– आदि की तीन प्रकृतियाँ…

01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 11

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – गति-जाति-शरीराङ्गोपाङ्-निर्माण-बन्धन-संघात-संस्थान-संहनन-स्पर्श-रस-गन्ध-वर्णानुपूर्वीगुरुलघुपघात-   परघातातातपोद्योतोच्छ्वास-विहायोगतयःप्रत्येकशरीर-त्रस-सुभग सुस्वर शुभ-सूक्ष्म-पर्याप्ती-स्थिरादेय-यशःकीर्ती-सेतराणी तीर्थंकरत्व च ॥११॥सूत्रार्थ– गति, जाति, शरीर,…

01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 9

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – दर्शनचारित्रमोहनीयाकषायकषायवेदनीयाख्यास्त्रिद्विनवषोडशभेदा: सम्यक्त्वमिथ्यात्वतदुभयान्यकषायकषायौ हास्यरत्यरतिशोक-भयजुगुप्सास्त्रीपुन्नपुंसकवेदा अनन्तानुबन्ध्यप्रत्याख्यान- प्रत्याख्यानसंज्वलनविकल्पाश्चैकशः क्रोधमानमायालोभा ॥९॥सूत्रार्थ– दर्शनमोहनीय, चारित्रमोहनीय, अकषायवेदनीय…

01- Tatvartha Sutra- Chapter 8 – Sutra 7

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – चक्षुरचक्षुरवधि-केवलानां निद्रा-निद्रानिद्रा-प्रचला-प्रचलाप्रचला-स्त्यानगृद्धश्च ॥७॥सूत्रार्थ– चक्षुदर्शन, अचक्षुदर्शन, अवधिदर्शन और केवलदर्शन – इन…