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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
हिंसाऽनृतस्तेयाब्रह्मपरिग्रहेभ्यो विरतिव्रतम् ॥१॥
Meaning
 हिंसा, अनृत (झूठ), स्तेय (चोरी), अब्रह्म और परिग्रह से विरक्त होना व्रत है॥१॥

भावार्थ

हिंसा आदि पापों का बुद्धिपूर्वक त्याग करने को व्रत कहते हैं। इन पाँच पापों का स्वरूप आगे बतलाएँगे । उनको त्यागने से अहिंसा, सत्य, अचौर्य, ब्रह्मचर्य और अपरिग्रह ये पाँच व्रत होते हैं। इन सबमें प्रधान अहिंसा व्रत है। इसी से उसे सब व्रतों के पहले रखा है। शेष चारों व्रत तो उसी की रक्षा के लिए है। जैसे खेत में धान बोने पर उसकी रक्षा के लिए चारों ओर बाड़ा लगा देते हैं वैसे ही सत्य आदि चार व्रत अहिंसा व्रत की रक्षा के लिए बाड़ रूप हैं।Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

Desisting (virati) from injury (himsā), falsehood (anņta), stealing (steya), unchastity (abrahma) and attachment-to- possessions (parigraha) is the (fivefold) vow (vrata). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


व्रत
flowchart TB

A["व्रत"]

A --> B["निश्चय व्रत<br>(राग-द्वेषादि विकल्पों से रहित होना)"]

A --> C["व्यवहार व्रत<br>(प्रतिज्ञा पूर्वक पाँच पापों के राग-<br>विरति-निवृत्ति रूप नियम लेना)"]

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer सातवें अध्याय में आस्रव पदार्थ के व्याख्यान की प्रतिज्ञा करके आस्रव के एक सौ आठ भेदों की संख्या का अनेक रीतियों से विचार किया है। पुण्य रूप और पापरूप कषायों का निमित्त होने से वह आस्रव दो प्रकार का है- (१) पुण्यास्रव (२) पापास्रव ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer विरति शब्द प्रत्येक के साथ लगाना चाहिए। जैसे- हिंसा से विरति, असत्य से विरति, स्तेय से विरति, अब्रह्म से विरति, परिग्रह से विरति ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



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Diksha Jain created this page on 3-Mar-2026

Courtesy:
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