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Acharya Shri Umaswati
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आकाशस्यावगाहः ॥१८॥
सूत्रार्थ– अवकाश देना आकाश का उपकार है ॥१८॥

भावार्थ

अर्थ : सब द्रव्यों को अवकाश देना आकाश द्रव्य का उपकार है।
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

The function of the space (akasa) is to provide accommodation (avagaha).
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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आकाश का उपकार – मुख्य बिंदु
आकाश का उपकार – मुख्य बिंदु
1. समस्त द्रव्यों को अवगाह में आकाश साधारण कारण है।
2. यद्यपि मूर्तिक का मूर्तिक से व्याघात होता है, पर इससे आकाश की अवगाह देने रूप सामर्थ्य नहीं नष्ट होती।
3. अलोकाकाश का भी अवगाह देने का स्वभाव है।

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Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: यदि अतीन्द्रिय धर्म और अधर्म द्रव्य का अस्तित्व जीव और पुद्गलों की गति और स्थिति के उपकार से जाना जाता है तो धर्म और अधर्म द्रव्य के बाद उद्दिष्ट (कथित) अतीन्द्रिय आकाश के अधिगम में क्या उपकार है? ऐसा पूछने पर यह सूत्र कहा गया है
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

उत्तर : सहज शुद्ध सुखामृतरस के आस्वाद वाले परम समरसी भाव से भरितावस्थ केवलज्ञानादि अनन्तगुण के आधार रूप, लोकाकाश प्रमाण असंख्यात निज शुद्ध प्रदेशों में यद्यपि निश्चयनय से सिद्ध भगवन्त रहते हैं तो भी उपचरित असद्भूत व्यवहारनय से ‘सिद्ध भगवान मोक्षशिला पर रहते हैं’ ऐसा कहा जाता है। ऐसा मोक्ष जिस प्रदेश में परमध्यान द्वारा आत्मा स्थिर होकर कर्मरहित होता है, वहाँ ही होता है, अन्यत्र नहीं; ध्यान करने के स्थान में कर्मपुद्गलों को छोड़कर ऊर्ध्वगमन स्वभाव से गति करके मुक्तात्मायें लोकाग्र में स्थिर होती हैं अतः उपचार से लोक के अग्रभाग को भी मोक्ष कहते हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



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Diksha Jain created this page on 12-feb-2026

Courtesy:
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