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Acharya Shri Umaswami
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विशुद्धिक्षेत्रस्वामिविषयेभ्योऽवधिमनःपर्यययो:।।२५।।
सूत्रार्थ – विशुद्धि, क्षेत्र, स्वामी और विषय की अपेक्षा अवधिज्ञान और मनःपर्ययज्ञान में भेद है।।२५।।

भावार्थ

अवधिज्ञान और मनःपर्यय ज्ञान में विशुद्धि, क्षेत्र स्वामी और विषय की अपेक्षा से अंतर है।
Ref: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning

Telepathy (manahparyayajñāna) and clairvoyance (avadhijñāna) differ with regard to purity (viśuddhhi), space (ksetra), possessor (svāmī) and subject matter (visaya).
Ref: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


अवधि–मनःपर्यय ज्ञान में अंतर
अवधिज्ञान मनःपर्ययज्ञान
विशुद्धि कम विशुद्ध अधिक विशुद्ध
उत्पत्ति क्षेत्र त्रस नाड़ी मनुष्य लोक
विषय क्षेत्र समस्त लोक ४५ लाख योजन का घनप्रतर रूप क्षेत्र
स्वामी चारों गति के
सैनी पंचेन्द्रिय
पर्याप्त जीव
– कर्मभूमि के गर्भज मनुष्यों को एवं
– जो संयमी हों एवं
– जो वर्धमान चारित्र सहित हों एवं
– जिनके ७ ऋद्धियों में से
कम से कम १ ऋद्धि हो
विषय परमाणु तक अवधिज्ञान के विषय का अनंतवाँ भाग
(मन के विकल्प ज्यादा सूक्ष्म होते हैं)

Reference : Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-ChabdaLink


Questions and Answers: शङ्का -समाधान
समाधान: जो वेदक सम्यक्त्व के पीछे द्वितीयोपशम सम्यक्त्व को प्राप्त होता है उस उपशम सम्यग्दृष्टी के प्रथम समय में भी मनःप्रर्ययज्ञान पाया जाता है। किन्तु मिथ्यात्व से पीछे आये हुए (प्रथम) उपशम सम्यग्दृष्टी में मनःप्रर्ययज्ञान नहीं पाया जाता है, क्योंकि मिथ्यात्व से पीछे आये हुए उपशम सम्यग्दृष्टी के उपशम सम्यक्त्व के उत्कृष्ट काल से भी ग्रहण किये गये संयम के प्रथम समय से लगा कर सर्व जघन्य मनःप्रर्ययज्ञान को करने वाला संयमकाल बहुत बड़ा है।

उत्तर : इन दोनों ज्ञानों में अवधिज्ञान की अपेक्षा मनःप्रर्यय ज्ञान विशुद्धतर है। क्योंकि मनःप्रर्यय ज्ञान का विषय सूक्ष्म है।



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 19-Dec-2025.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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