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Acharya Shri Umaswami
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सर्वद्रव्यपर्यायेषु केवलस्य॥२९॥
सूत्रार्थ – केवलज्ञान की प्रवृत्ति सब द्रव्य और उनकी सब पर्यायों में होती है॥२९॥


भावार्थ

केवलज्ञान का विषय सर्व द्रव्यों की सर्व पर्यायों में है।
Ref: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning

Omniscience (kevalajñāna) extends to all substances (dravya) and all their modes (paryāya) simultaneously.
Ref: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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5 ज्ञानों का विषय
5 ज्ञानों का विषय
५ ज्ञानों का विषय
मति-श्रुत अवधि मनःपर्यय केवल
द्रव्य सर्व द्रव्य रूपी द्रव्य
* पुद्गल
* संसारी जीव
रूपी द्रव्य सर्व द्रव्य
पर्याय कुछ पर्यायें कुछ पर्यायें कुछ पर्यायें
(अवधि का अनन्तवाँ भाग)
सर्व पर्यायें

Reference : Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-ChabdaLink


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Questions and Answers: शङ्का -समाधान
समाधान: आत्मा ही तत्व है ऐसा मानने वालों के मत का खण्डन करने के लिए ‘द्रव्य’ बहुवचन किया है एवं सर्वज्ञ वर्तमान पर्याय को ही जानते हैं, क्योंकि भूत भविष्य की पर्याय द्रव्य में नहीं हैं, ऐसा मानने वालों के मत का खण्डन करने के लिए ‘पर्यायेषु’ बहुवचन दिया है।

उत्तर : इन सामान्य-विशेष, विरोधी-अविरोधी पर्यायों में द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव के निमित्त से होने वाले औदयिक, क्षायोपशमिकादि पर्याय उपात्त हेतुक और तीनों ही कालों में अविकारी पारिणामिक चैतन्यादि भाव अनुपात्त हेतुक हैं।



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 20-Dec-2025.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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