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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
एक-प्रदेशादिषु भाज्य: पुद्गलानाम् ।।१४।।
Meaning
(पुद्गलानाम्) पुद्गल द्रव्य का अवगाहन (एकप्रदेशादिषु) लोकाकाश
के एक प्रदेश को लेकर संख्यात असंख्यात प्रदेशों में (भाज्य) विभाग करने योग्य है।।१४।।

भावार्थ

पुद्गलों का अवगाह लोकाकाश के एक प्रदेश से लगाकर असंख्यात प्रदेशों में है अर्थात् एक परमाणु आकाश के एक प्रदेश में रहता है। दो परमाणु यदि जुदे – जुदे होते हैं तो दो प्रदेशों में रहते हैं और यदि परस्पर में बँधे हों तो एक प्रदेश में रहते हैं। इसी तरह संख्यात, असंख्यात और अनंत प्रदेशी स्कन्ध लोकाकाश के एक प्रदेश में अथवा संख्यात या असंख्यात प्रदेशों में रहते हैं। जैसा स्कन्ध होता है उसी के अनुसार स्थान में वह रहता है।Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

The forms of matter ( pudgala) occupy ( inhabit) from one space-point (pradeśa) onwards. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain



Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer  जैसे प्रकाश मूर्तिक है फिर भी एक घर में अनेक दीपकों का प्रकाश रह जाता है, वैसे ही सूक्ष्म परिणमन होने से लोकाकाश के एक प्रदेश में बहुत से पुद्गल परमाणु रह सकते हैं ।
Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

Answer  धर्मादि द्रव्यों से विपरीत मूर्त्तिमान पुद्गलों के संख्यात, असंख्यात और अनन्त प्रदेशों के अवगाहन विशेष का प्रतिपादन करने के लिए यह सूत्र कहा गया है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 12-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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