
Acharya Shri Umaswati
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Sutra
नित्यावस्थितान्य रूपाणि ॥ ४ ॥
Meaning
ऊपर कहे हुए सभी द्रव्य नित्य, अवस्थित और अरूपी हैं। कभी नष्ट नहीं होते, इसलिए नित्य हैं। अपनी ६ संख्या का उल्लंघन नहीं करते, इसलिये अवस्थित हैं और रूप, रस, गन्ध तथा स्पर्श से रहित हैं, इसलिये अरूपी हैं ॥४ ॥


भावार्थ
कभी नष्ट नहीं होते, इसलिये नित्य हैं। अपनी छह संख्या का उल्लंघन नहीं करते इसलिये अवस्थित हैं। और रूप, रस, गन्ध तथा स्पर्श से रहित हैं इसलिये अरूपी हैं। Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
English Meaning:
The substances (dravya) are eternal (nitya), fixed-in- number (avasthita) and colourless (arūpī). ‘Nitya’ means eternal. From the point of view of modes (paryāya) -Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
Questions and Answers: शङ्का -समाधान
Answer ऐसा नहीं कहना चाहिए क्योंकि धर्मादि द्रव्यों के गत्युपग्रह, स्थित्युपग्रह, उत्पाद, व्यय, ध्रौव्य, मूर्त्तिमत्त्व, अमूर्त्तिमत्त्व आदि अनेक लक्षण वाले अनेक परिणमन होते हैं, अत: नित्य के बाद भी अवस्थित वचन का कथन किया है। इससे जाना जाता है कि धर्मादि द्रव्य गति-उपग्रह आदि रूप से अनेक रूप परिणमन करने पर भी कभी धर्म, अधर्म, आकाश और काल में मूर्त्तिमत्त्व, उपयोगत्व परिणाम नहीं होते। जीव में अचेतनत्व और पुद्गल में अमूर्त्तत्व नहीं आ सकते इसलिए सर्व द्रव्य नित्य होते हुए भी अपने स्वरूप का त्याग नहीं करते, इस कथन को सूचित करने के लिए अवस्थित वचन का ग्रहण किया है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
Answer इस कथन में कोई विरोध नहीं है क्योंकि उभय नय का सद्भाव है। धर्मादि सर्व द्रव्यों में द्रव्यार्थिक नय और पर्यायार्थिक नय की गौण-मुख्य विवक्षा से अनेक प्रकार का परिणमन बन जाता है स्थिति, उत्पत्ति और ध्रौव्यत्व एक साथ रहते हैं, इसमें कोई विरोध नहीं है अर्थात् द्रव्यार्थिक नय की अपेक्षा नित्य और अवस्थित हैं और पर्यायार्थिक नय की अपेक्षा परिणमन होता है, इसमें कोई विरोध नहीं है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
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- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
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Diksha Jain created this page on 11-feb-2026
Courtesy:
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