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Acharya Shri Umaswati
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जीवाश्च ॥३॥
सूत्रार्थ– जीव भी द्रव्य है।


भावार्थ

अर्थ: जीव भी द्रव्य है। यहाँ ‘जीवाः’ बहुवचन दिया है। अतः जीव द्रव्य बहुत से हैं ऐसा समझना।।३।।
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

The soul (jiva) also are subtances (dravya).
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: जीवों की विविधता का सूचन करने के लिए ‘जीवा:’ बहुवचन किया है। संसारी और मुक्त जीव विविध प्रकार के हैं। संसारी जीव भी गति, इन्द्रिय आदि चौदह मार्गणास्थान, मिथ्यादृष्टि आदि चौदह गुणस्थान, सूक्ष्म-बादर आदि जीवस्थान की अपेक्षा विविध प्रकार के होते हैं। मुक्त जीव भी एक, दो, तीन, संख्यात, असंख्यात और अनन्त समय सिद्ध पर्याय के आश्रय से तथा मुक्ति-प्राप्ति के कारण- भूत शरीर के आकार की अनुविधायी स्वक्षेत्र – परक्षेत्र, अवगाहन आदि के भेद से अनेक प्रकार के हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

उत्तर :  यद्यपि ‘द्रव्याणि जीवाः’ ऐसा एक योग करने पर ‘च’ शब्द नहीं होने के कारण लघु सूत्र तो होता परन्तु इससे जीवों का ही प्रसंग होता और ऐसा होने पर जीव ही द्रव्य कहे जा सकते, धर्मादि नहीं। अतः अनिष्ट का प्रसंग आता है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 11-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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