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Acharya Shri Umaswati
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विदेहेषु संख्येयकालाः ।।३१।।
सूत्रार्थ – विदेहों में संख्यात वर्ष की आयु वाले मनुष्य हैं।।३१।।


भावार्थ

अर्थ : पाँचों मेरु संबंधी पाँच विदेह क्षेत्रों में मनुष्यों की आयु संख्यात वर्ष की होती है।
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

In the Videha regions the lifetime of human beings is numerable (samkhyata) years.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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भोगभूमि एवं कर्मभूमि के काल
क्र.कालों के नामस्थिति प्रमाणमनुष्यों की आयुशरीर की ऊँचाईवर्णआहार
1सुषमा सुषमा4 कोड़ाकोड़ी सागर3 पल्य – 2 पल्य3 कोस – 2 कोसउदित सूर्य सदृश3 दिन बाद बेर जितना
2सुषमा3 कोड़ाकोड़ी सागर2 पल्य – 1 पल्य2 कोस – 1 कोसपूर्ण चन्द्र सदृश2 दिन बाद बेर जितना
3सुषमा दु:षमा2 कोड़ाकोड़ी सागर1 पल्य – 1 पूर्व कोटि1 कोस – 500 धनुषप्रियञ्जु (हरा) सदृश1 दिन बाद आँवले जितना
4दु:षमा सुषमा42,000 वर्ष
क्रम 1 कोड़ाकोड़ी सागर
1 पूर्व कोटि – 120 वर्ष500 धनुष – 7 हाथपाँचों वर्णप्रतिदिन 1 बार
5दु:षमा21,000 वर्ष120 वर्ष – 20 वर्ष7 हाथ – 2 हाथपाँचों वर्ण कान्तिहीनबहुत बार
6दु:षमा दु:षमा21,000 वर्ष20 वर्ष – 15 वर्ष2 हाथ – 1 हाथधूमवर्ण सदृशबार-बार, तीव्र गृहता के साथ

नोट: काल परिवर्तन भरत-ऐरावत क्षेत्रों में ही होता है। यह तालिका अवसर्पिणी काल की है, उत्सर्पिणी में इससे ठीक विपरीत होता है। 1,2,3 भोगभूमि एवं 4,5,6, कर्मभूमि के काल


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Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: निषध पर्वत के उत्तर में और नील पर्वत के दक्षिण में अर्थात् इन दोनों पर्वतों के मध्य में सबसे बड़ा विदेह क्षेत्र है। यह जम्बूद्वीप के बीच के हिस्से से बड़ा है।
Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूषLink to book

उत्तर विदेह क्षेत्र में हमेशा चौथा काल रहता है। जिससे वहाँ नित्य तीर्थंकर, चक्रवर्ती, केवली, नारायण, ऋद्धिधारी मुनि, बलदेव, मण्डलीक, अर्धमण्डलीक आदि भी होती रहती है।
Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूषLink to book



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Diksha Jain created this page on 8-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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