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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
विदेहेषु संख्येयकालाः ।। ३१ ।।
Meaning
(विदेहेषु) विदेहक्षेत्र में स्थित जीव (संख्येयकाला ) संख्यातवर्ष कीआयु वाले हैं विदेह क्षेत्र में उत्सर्पिणीकाल का तीसरा या अवसर्पिणीकाल का चौथा काल सदा अवस्थित है। इसमें मनुष्यों की ऊँचाई पाँच सौ धनुष प्रमाण होती है और उत्कृष्टआयु एक पूर्व कोटि प्रमाण होती है। प्राय: इसी काल से जीव मुक्ति लाभ करते हैं। विदेह क्षेत्र में यह काल सदा रहता है इसलिये यहाँ से जीव हमेशा मोक्ष जाते हैं।
।। ३१ ।।

भावार्थ

(विदेहेषु) विदेह क्षेत्र में मनुष्यों और तिर्यञ्चों की आयु (संख्येयकाला ) संख्यात वर्ष की होती है।विदेह क्षेत्र में उत्सर्पिणीकाल का तीसरा या अवसर्पिणीकाल का चौथा काल सदा अवस्थित है। इसमें मनुष्यों की ऊँचाई पाँच सौ धनुष प्रमाण होती है और उत्कृष्टआयु एक पूर्व कोटि प्रमाण होती है। प्राय: इसी काल से जीव मुक्ति लाभ करते हैं। विदेह क्षेत्र में यह काल सदा रहता है इसलिये यहाँ से जीव हमेशा मोक्ष जाते हैं। Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

English Meaning:

In the Videha regions the lifetime of human beings is numerable (samkhyāta) years. In all the five Videha regions the duration of life of human beings is numerable (samkhyāta) years. The time like that of the closing period of suṣamaduṣṣamă prevails throughout. The height of human beings is five hundred bows (dhanusa); they take food everyday. The maximum duration of life is one purvakoți years and the minimum is antarmuhurta. The following verse is quoted in this connection. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


भोगभूमि एवं कर्मभूमि के काल
क्र.कालों के नामस्थिति प्रमाणमनुष्यों की आयुशरीर की ऊँचाईवर्णआहार
1सुषमा सुषमा4 कोड़ाकोड़ी सागर3 पल्य – 2 पल्य3 कोस – 2 कोसउदित सूर्य सदृश3 दिन बाद बेर जितना
2सुषमा3 कोड़ाकोड़ी सागर2 पल्य – 1 पल्य2 कोस – 1 कोसपूर्ण चन्द्र सदृश2 दिन बाद बेर जितना
3सुषमा दु:षमा2 कोड़ाकोड़ी सागर1 पल्य – 1 पूर्व कोटि1 कोस – 500 धनुषप्रियञ्जु (हरा) सदृश1 दिन बाद आँवले जितना
4दु:षमा सुषमा42,000 वर्ष
क्रम 1 कोड़ाकोड़ी सागर
1 पूर्व कोटि – 120 वर्ष500 धनुष – 7 हाथपाँचों वर्णप्रतिदिन 1 बार
5दु:षमा21,000 वर्ष120 वर्ष – 20 वर्ष7 हाथ – 2 हाथपाँचों वर्ण कान्तिहीनबहुत बार
6दु:षमा दु:षमा21,000 वर्ष20 वर्ष – 15 वर्ष2 हाथ – 1 हाथधूमवर्ण सदृशबार-बार, तीव्र गृहता के साथ

नोट: काल परिवर्तन भरत-ऐरावत क्षेत्रों में ही होता है। यह तालिका अवसर्पिणी काल की है, उत्सर्पिणी में इससे ठीक विपरीत होता है। 1,2,3 भोगभूमि एवं 4,5,6, कर्मभूमि के काल


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer  निषध पर्वत के उत्तर में और नील पर्वत के दक्षिण में अर्थात् इन दोनों पर्वतों के मध्य में सबसे बड़ा विदेह क्षेत्र है। यह जम्बूद्वीप के बीच के हिस्से से बड़ा है।
Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

Answer  विदेह क्षेत्र में हमेशा चौथा काल रहता है। जिससे वहाँ नित्य तीर्थंकर, चक्रवर्ती, केवली, नारायण, ऋद्धिधारी मुनि, बलदेव, मण्डलीक, अर्धमण्डलीक आदि भी होती रहती है।
Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book



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Diksha Jain created this page on 8-feb-2026

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