
Acharya Shri Umaswati
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Sutra
एकद्वित्रि पल्योपमस्थितयो हैमवतक-हारिवर्षकदैवकुरवकाः
॥२९ ॥
Meaning
(हैमवतक) हैमवत, (हारि) हरि और (देवकुरवकाः) देवकुरु (विदेह क्षेत्र के अन्तर्गत एक विशेष स्थान) के निवासी मनुष्य वा तिर्यञ्चों की आयु क्रम से (एकद्वित्रिपल्योपमस्थितयः) एक पल्य, दो पल्य और तीन पल्य की (भवति) होती॥२९ ॥

भावार्थ
हैमवत क्षेत्र के प्राणियों की स्थिति एक पल्य प्रमाण होती है। यहाँ निरन्तर उत्सर्पिणीकाल का चौथा या अवसर्पिणीकाल का तीसरा काल प्रवर्तता है। मनुष्यों के शरीर की ऊँचाई दो हजार धनुष होती है। रंग नीलवर्ण होता है और वे एक दिन के अन्तराल से भोजन करते हैं।हरिवर्ष क्षेत्र के प्राणियों की स्थिति दो पल्य प्रमाण होती है। यहाँ निरन्तर उत्सर्पिणीकाल का पाँचवाँ या अवसर्पिणीकाल का दूसरा काल प्रवर्तता है। मनुष्यों के शरीर की ऊँचाई चार हजार धनुष होती है। रंग शुक्ल होता है और वे दो दिन के अन्तराल से भोजन करते हैं।देवकुरु क्षेत्र के प्राणियों की स्थिति तीन पल्य प्रमाण होती है। यहाँ निरन्तर उत्सर्पिणीकाल का छठा और अवसर्पिणीकाल का पहला काल प्रवर्तता है। मनुष्यों के शरीर की ऊँचाई छह हजार धनुष होती है, रंग पीत होता है और वे तीन दिन के अन्तराल से भोजन करते हैं।Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
English Meaning:
The lifetimes of human beings in Haimavata, Hari and Devakuru are one, two and three palyopama, respectively. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
Questions and Answers: शङ्का -समाधान
Answer पाँच हैमवत क्षेत्रों में स्थित जीवों की आयु एक पल्य, पाँचों हरिवर्ष क्षेत्रों में स्थित जीवों की दो पल्य एवं पाँचों देवकुरु क्षेत्रों में स्थित जीवों की आयु तीन पल्य प्रमाण है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
Answer हैमवत क्षेत्र के जीवों के सात-सात दिन में अंगुष्ठ चूसनादि क्रियायें होती हैं इसलिए वे उनचास दिन में, हरिवर्ष क्षेत्र के जीवों के पाँच-पाँच दिन अंगुष्ठ चूसनादि क्रिया होती है, इसलिए वे पैंतीस दिन में तथा देवकुरु क्षेत्र के जीवों के तीन-तीन दिन ही अंगुष्ठ चूसनादि क्रिया होती है, इसलिए वे इक्कीस दिन में ही युवा होकर दाम्पत्य जीवन अंगीकार कर लेते हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
- Tatvartha_Sutra_Muni_Sudhasagarji_तत्वार्थसूत्रमुनिसुधासागर_जी
- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 8-feb-2026
Courtesy:
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