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Acharya Shri Umaswati
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मणिविचित्रपार्श्वो उपरि मूले च तुल्यविस्ताराः ।।१३।।
 सूत्रार्थ– इनके पार्श्व मणियों से चित्र-विचित्र हैं तथा वे ऊपर, मध्य और मूल में समान विस्तारवाले हैं।


भावार्थ

अर्थ: इन पर्वतों के पार्श्व भाग नाना प्रकार की मणियों से खचित हैं तथा वे ऊपर, मध्य और मूल में समान विस्तार वाले हैं।
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

Studded with various jewels, the sides of these mountains are variegated and the mountains are of equal width at the foot, in the middle and at the top.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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पर्वत / कुलाचल
नामरंगलम्बाईआकारचौड़ाईविशेष
हिमवानसोनापूर्व से पश्चिम समुद्र तकदीवार की भाँतिऊपर, नीचे व मूल में एक जैसाआजु-बाजु में विचित्र मणियों से जड़ा हुआ
महाहिमवानचाँदीपूर्व से पश्चिम समुद्र तकदीवार की भाँतिऊपर, नीचे व मूल में एक जैसाआजु-बाजु में विचित्र मणियों से जड़ा हुआ
निषधतपाया हुआ सोनापूर्व से पश्चिम समुद्र तकदीवार की भाँतिऊपर, नीचे व मूल में एक जैसाआजु-बाजु में विचित्र मणियों से जड़ा हुआ
नीलवैडूर्य नील मणिपूर्व से पश्चिम समुद्र तकदीवार की भाँतिऊपर, नीचे व मूल में एक जैसाआजु-बाजु में विचित्र मणियों से जड़ा हुआ
रुक्मीचाँदीपूर्व से पश्चिम समुद्र तकदीवार की भाँतिऊपर, नीचे व मूल में एक जैसाआजु-बाजु में विचित्र मणियों से जड़ा हुआ
शिखरीसोनापूर्व से पश्चिम समुद्र तकदीवार की भाँतिऊपर, नीचे व मूल में एक जैसाआजु-बाजु में विचित्र मणियों से जड़ा हुआ

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Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: इन पर्वतों के पार्श्वभाग नाना रंग और नाना प्रकार की प्रभा आदि गुणों से युक्त मणियों से विचित्र हैं। इसलिए ‘मणिविचित्रपार्वा ‘ पद सूत्र में दिया गया है। (सर्वा. ३९१ )’मणिविचित्रपार्वा:’ कहने से ये पर्वत अनादि काल से नाना प्रकार की मणियों से विचित्र पार्श्व भाग वाले हैं, यह जाना जाता है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: सूत्र में अनिष्ट आकार का निराकरण करने के लिए ‘उपरि’ पद कहा गया है तथा मध्य भाग का समुच्चय करने के लिए ‘च’ शब्द का ग्रहण किया है अर्थात् इनके मूल में जो विस्तार है वही ऊपर और मध्य में है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 5-feb-2026

Courtesy:
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