
Acharya Shri Umaswati
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तद्विभाजिनः पूर्वापरायता हिमवन्महाहिमवन्निषधनीलरुक्मि-शिखरिणो वर्षधरपर्वताः ।।११।।
सूत्रार्थ– उन क्षेत्रों को विभाजित करने वाले और पूर्व- पश्चिम लम्बे ऐसे हिमवान, महाहिमवान, निषध, नील, रुक्मी और शिखरी- ये छह वर्षधर पर्वत हैं।
भावार्थ
अर्थ : अर्थ : परमाणु के प्रदेश नहीं होते, क्योंकि परमाणु एक प्रदेशी ही है। जैसे आकाश के एक प्रदेश के और विभाग न हो सकने से वह अप्रदेशी है वैसे ही परमाणु भी एक प्रदेशी ही है। अतः उसके दो तीन आदि प्रदेश नहीं होते। तथा पुद्गल के सबसे छोटे अंश को जिसका दूसरा विभाग नहीं हो सकता, परमाणु कहते हैं। अतः परमाणु से छोटा यदि कोई द्रव्य होता है तो उसके प्रदेश हो सकते थे किंतु उससे छोटा कोई द्रव्य है नहीं। इससे परमाणु एक प्रदेशी ही है
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf
English Meaning:
The six mountain chains Himavān, Mahāhimavān, Niṣadha, Nīla, Rukmī, and Śikharī, running from east to west, divide these regions.
Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
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Questions and Answers: शङ्का -समाधान
समाधान: यह हिमवन पर्वत भरत और हैमवत क्षेत्र की सीमा में स्थित है। इसे क्षुद्र हिमवन भी कहते हैं क्योंकि महाहिमवन पर्वत की अपेक्षा यह लघु है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
उत्तर: हिमवन पर्वत पृथ्वी के नीचे पच्चीस योजन गहरा तथा सौ योजन ऊँचा है। इसका विष्कम्भ (चौड़ाई) एक हजार बावन तथा एक योजन के उन्नीस भागों में से बारह भाग प्रमाण है। इस क्षुद्र हिमवन पर्वत की उत्तर जीवा चौबीस हजार नौ सौ बत्तीस योजन और एक योजन के उन्नीस भागों में से कुछ कम एक भाग प्रमाण है । इसकी पार्श्वभुजा का प्रमाण पाँच हजार तीन सौ पचास योजन और एक योजन के उन्नीस भागों में से साढ़े पन्द्रह भाग अधिक है । इस पर्वत का धनुःपृष्ठ उत्तर भाग में पच्चीस हजार दो सौ तीस योजन और एक योजन के उन्नीस भागों में से चार भाग से कुछ अधिक है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
- Tatvartha_Sutra_Muni_Sudhasagarji_तत्वार्थसूत्रमुनिसुधासागर_जी
- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 5-feb-2026
Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project
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