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Acharya Shri Umaswati
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स्पर्शनरसनघ्राणचक्षुःश्रोत्राणि।।१९।।
सूत्रार्थ- स्पर्शन, रसना, घ्राण, चक्षु और श्रोत्र- ये पाँच इन्द्रियाँ हैं ।।१९।।

भावार्थ

अर्थ: वीर्यान्तराय और मतिज्ञानावरण कर्म का क्षयोपशम होने से तथा अंगोपांग नाम कर्म का उदय होने से आत्मा जिसके द्वारा पदार्थों को छूकर जानता है उसे स्पर्शन इन्द्रिय कहते हैं। जिसके द्वारा आत्मा रस को ग्रहण करता है उसे रसनाइन्द्रिय कहते हैं। जिसके द्वारा गंध को ग्रहण करता है उसे घ्राणइन्द्रिय कहते हैं। जिसके द्वारा देखता है उसे चक्षु इन्द्रिय कहते हैं और जिसके द्वारा सुनता है उसे श्रोत्र इन्द्रिय कहते हैं ।।१९।।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

English Meaning:

Touch (sparśana), taste (rasanā), smell (ghrāna), sight (caksu) and hearing (śrotra) are the senses- indriya.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: वीर्यान्तराय और मतिज्ञानावरण कर्म के क्षयोपशम से तथा अंगोपांग नामकर्म के आलम्बन से आत्मा जिसके द्वारा स्पर्श करता है वह स्पर्शन इन्द्रिय है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: “वनस्पत्यन्तानाममेकं” इस सूत्र में पृथ्वी को लेकर वनस्पति पर्यन्त एक स्पर्शन इन्द्रिय का ही व्यापार है इसलिए स्पर्शन को आदि में ग्रहण करना योग्य है। सर्व संसारी जीवों में इसकी उपलब्धि है। सर्व संसारी जीवों में स्पर्शन इन्द्रिय अवश्य पायी जाती है, इसलिए नाना जीवों की अपेक्षा व्याप्ती होने से आदि में स्पर्शन इन्द्रिय का ग्रहण किया है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 5 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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