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Acharya Shri Umaswati
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पञ्चेन्द्रियाणि ॥१५॥
सूत्रार्थ– इंद्रियाँ पाँच है ॥१५॥


भावार्थ

अर्थ– (इन्द्रियाणि) इन्द्रियाँ (पञ्च) पाँच होती हैं। इन्द्रिय – जिससे संसारी जीव की पहचान होती है उसे इन्द्रिय कहते हैं।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

English Meaning:

The senses (indriya) are five.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


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इन्द्रियाँ (जीव की पहचान के चिह्न)
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Video Pravachans

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: यहाँ उपयोग का प्रकरण है अतः उपयोग की साधनभूत ज्ञानेन्द्रियों को ही यहाँ ग्रहण किया है अथवा वचन, उपस्थ आदि का अनवस्थान होने से उनमें अनिष्क्रियत्व है। वायु, पानी आदि अनिन्द्रिय है, उपयोग साधनों में उनका व्यपदेश नहीं है, क्रिया साधनों में है। क्रिया के साधनभूत अंगों को यदि इन्द्रियों की श्रेणी में गिना जाय तो मस्तक आदि अनेक अवयवों को भी इन्द्रिय मानना पड़ेगा, क्योंकि मस्तक आदि भाव-क्रिया के साधन हैं और अवयवों को इन्द्रिय मान लेने पर इन्द्रियों की संख्या ही निश्चित नहीं की जा सकती। (अतः उनका यहाँ ग्रहण नहीं किया)
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: अपनी प्रक्रिया को कहने वाले कोई अन्यमतवादी पाँच, छह और ग्यारह भी इन्द्रियाँ मानते हैं। उनका निराकरण करने के लिए ‘इन्द्रियाँ पाँच हैं, अधिक नहीं’ ऐसा नियम करने के लिए ‘पञ्चेन्द्रियाणि’ सूत्र कहा है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 4 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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