Table of Contents

Acharya Shri Umaswati
Read About Acharya Umaswami
here


Sutra
द्विर्धातकीखण्डे ॥ ३३ ॥
Meaning
धातकी खण्ड नामक दूसरे द्वीप में भरतादि क्षेत्र दो-दो हैं ।

भावार्थ

धातकीखण्ड में दो मेरु, चौदह क्षेत्र, बारह पर्वत, बारह तालाब और अट्ठाईस नदी इत्यादि हैं। इन सबके नाम भी वे ही है जो जम्बूद्वीप में बतलाये हैं। केवल मेरु पर्वतों के नाम भिन्न हैं। मानुषोत्तर पर्वत के बाद जितने भी द्वीप और समुद्र हैं उनमें जघन्य भोगभूमि, स्वयम्भूरमणद्वीप के स्वयंप्रभाचलपर्वत के पूर्व तक भोगभूमि तथा उसके बाद द्वीप तथा समुद्र कर्मभूमि हैं। तकीखण्ड द्वीप बलयाकृति है। इसके पूर्वार्ध और पश्चिमार्ध इस प्रकार दो विभाग हैं। यह विभाग इष्वाकार नामवाले दो पर्वत करते हैं जो उत्तर से दक्षिण तक द्वीप के विष्कम्भ प्रमाण, लम्बे हैं। इससे धातकीखण्ड द्वीप के दो भाग होकर प्रत्येक तत्वार्थ सूत्र / मोक्ष शास्त्र भाग में एक मेरु, सात क्षेत्र, छह वर्षधर, चौदह नदियाँ और छह हद प्राप्त होते हैं। इस प्रकार ये सब जम्बूद्वीप से धातकीखण्ड द्वीप में दूने हो जाते हैं। इस द्वीप में पर्वत पहिये के आरे के समान हैं और क्षेत्र आरों के बीच में स्थित विवर के समान हैं। Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

English Meaning:

In Dhatakikhaṇḍa the regions and the mountains, etc., are double that of Jambudvipa. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain



Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer जम्बूद्वीप में जहाँ जम्बूवृक्ष है, धातकी खण्ड में वहाँ धातकी वृक्ष है। उस वृक्ष का वर्णन तथा इसके परिवार वृक्ष जम्बूद्वीप के समान हैं। उस वृक्ष पर निवास करने वाला द्वीपाधिपति (धातकी खण्ड का अधिपति) होने से इस द्वीप का नाम धातकी खण्ड जानना चाहिए।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

Answer जैसे चक्र के आरे होते हैं उसी प्रकार के आकार वाले धातकी खण्ड के हिमवन् आदि पर्वत हैं और चक्र के बीच के भाग के समान भरतादि क्षेत्र हैं। ये क्षेत्र और पर्वत दोनों तरफ समुद्रों का स्पर्श करते हैं अर्थात् एक तरफ लवणसमुद्र और एक तरफ कालोदधि समुद्र, दोनों के बीच धातकी खण्ड होने से दोनों तरफ समुद्र का स्पर्श होता है। उस धातकी खण्ड द्वीप को चारों तरफ से घेरे हुए कालोदधि समुद्र है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 8-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



All Sutras Chapter2


    All Chapters