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Acharya Shri Umaswami
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क्षयोपशमनिमित्तः षड्विकल्पः शेषाणाम्।।२२।।
सूत्रार्थ – क्षयोपशम निमित्तक अवधिज्ञान छह प्रकार का है, जो शेष अर्थात् तिर्यंचों और मनुष्यों के होता है।।२२।।

भावार्थ

क्षयोपशम निमित्त नामक अवधिज्ञान छः प्रकार का होता है और वह मनुष्य और तिर्यंचों के होता है।
Ref: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning

Clairvoyance (avadhijñāna) due to destruction-cum-subsidence (ksayopaśama) is of six kinds. It is acquired by the rest, namely, human beings, and animals.
Ref: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


भाव प्रत्ययगुण प्रत्यय (क्षयोपशम निमित्तिक)
स्वरूपजिसके होने में भव ही कारण होजिसके होने में सम्यग्दर्शनादि कारण हो
स्वामीसर्व देव, नारकी, तीर्थंकरमनुष्य, तिर्यंच

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config:
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flowchart LR
    A["गुणप्रत्यय-6"] --> B["1-अनुगामी<br>(अन्यक्षेत्र / भव में साथ जाए)"] & C["2-अननुगामी<br>(अन्य क्षेत्र / भव में साथ न जाए)"] & D["3-वर्धमान<br>(बढ़ता हुआ)"] & E["4-हीयमान<br>(घटता हुआ)"] & F["5-अवस्थित<br>(न घटे, न बढ़े)"] & G["6-अनवस्थित<br>(घटता, बढ़ता रहे)"]

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अन्य प्रकार से अवधिज्ञान के भेद
देशावधि
परमावधि
सर्वावधि
भावप्रत्यय
गुणप्रत्यय
परमावधि और सर्वावधि के स्वामी नियम से उसी भव में मोक्ष जाते हैं।
Questions and Answers: शङ्का -समाधान
समाधान: सर्वे शब्द सकलवाचित्व होने से द्रव्य, क्षेत्र, काल और भाव की अपेक्षा सर्वावधि के अन्तःपाति (अन्तःर्भूत) परमावधिज्ञान हैं (अन्तः) परमावधि भि देशावधि अवधिज्ञान के देशावधि और सर्वावधि ये ही दो भेद हैं।

उत्तर :अवधि ज्ञानावरण कर्म के देशघाती स्पर्धकों का उदय होने पर, सर्वघातीस्पर्धकों का उदयभावी क्षय और आगमी उदय में आने वाले उन्ही का सदवस्था रूप उपशम, इन दो निमित्तों से होने वाला अवधिज्ञान क्षयोपशम निमित्तक अवधिज्ञान कहलाता है।



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 18-Dec-2025.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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