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Acharya Shri Umaswami
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तन्निसर्गादधिगमाव्दा।।३।।
सूत्रार्थ – वह (सम्यदर्शन) निरसर्ग से और अधिगम से उत्पन्न होता है।।३।।

भावार्थ

सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति की अपेक्षा दो भेद होते हैं – निसर्गज और अधिगमज।
Ref: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष

English Meaning:

That – samyagdarśana – is attained by intuition – svabhāva, or by acquisition of knowledge – adhigama.
Ref: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Graphical representation
flowchart TB
    A["सम्यग्दर्शन की उत्पत्ति के हेतु"] --> B["निसर्गज<br>स्वभाव से"] & C["अधिगमज<br>पर के उपदेश से"]
    B --> B1["उदाहरण:<br>काँटे की नोंक<br>(काँटे की नोंक स्वाभाविक होती है)"]
    C --> C1["उदाहरण:<br>बाण की धार<br>(बाण की धार को बनाने के लिए<br>किसी की आवश्यकता होती है)"]

    style A fill:#FF6D00
    style B fill:#FFE0B2
    style C fill:#FFF9C4
    style B1 fill:#FFE0B2
    style C1 fill:#FFF9C4

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

उत्तर : इस सूत्र से पूर्व के सूत्र (दृष्टि) में सम्यग्दर्शन का ग्रहण किया है। उसी का निर्देश करने के लिए सूत्र में ‘तत्’ पद का ग्रहण किया है। अनन्तरवर्ती सूत्र में सम्यग्दर्शन का ही उल्लेख किया है, उसे ही यहाँ ‘तत्’ इस पद द्वारा निर्दिष्ट किया गया है। यदि ‘तत्’ पद न लिखते तो मोक्षमार्ग का प्रकरण होने से उसका ही ग्रहण हो जाता। यदि ‘तत्’ पद न होता तो मार्ग के सम्बंध का प्रसंग आ जाता। यहाँ मोक्षमार्ग का प्रकरण है इसलिए ‘तत्’ शब्द के ग्रहण बिना प्रधानभूत मोक्ष का सम्बन्ध हो जाता अर्थात मोक्षमार्ग दो प्रकार का हो जाता। इस प्रकार निसर्गमात्र से मोक्षमार्ग का लाभ हो जाता वा बहुश्रुतत्व- प्रदर्शन की इच्छा वाले मिथ्यादृष्टियों को भी अधिगम मात्र में मोक्षमार्ग का प्रसंग आ जाता।

Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर : हाँ, सभी सम्यक्त्व निरर्गज और अधिगमज होते हैं। जिस प्रकार औपशमिक सम्यग्दर्शन, निसर्ग और अधिगम दोनों से होता है, उसी प्रकार क्षायिक एवं क्षायोपशमिक सम्यक्त्व भी दोनों प्रकार से होते हैं।



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 12-Dec-2025.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project




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