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Acharya Shri Umaswami
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न चक्षुरनिन्द्रियाभ्याम्।।१९।।
सूत्रार्थ – चक्षु और मन से व्यंजनावग्रह नहीं होता।।१९।।

भावार्थ

लब्धि और उपयोग को भावेन्द्रिय कहते हैं। ज्ञानावरण कर्म के क्षयोपशम विशेष को लब्धि कहते हैं। इस लब्धि के होने पर ही जीव के द्रव्येन्द्रियों की रचना होती है तथा लब्धि के निमित्त से आत्मा का जो परिणाम होता है उसे उपयोग कहते हैं।
Ref: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning

Indistinct impression (vyańjanāvagraha) does not arise in case of the eyes (caksu) and the mind (anindriya, mana).
Ref: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


flowchart TB
    A["<b>मतिज्ञान का विषय व 336 भेद</b>"] --> B["<b>व्यञ्जन</b><br>(अप्रकट – अव्यक्त)"] & C["<b>अर्थ</b><br>(प्रकट – व्यक्त)"]
    B --> B1["सिर्फ अवग्रह → <b>1</b>"]
    B1 --> B2["नेत्र एवं मन के अलावा<br>शेष 4 इन्द्रियों से → <b>×4</b>"]
    B2 --> B3["12 प्रकार के पदार्थ → <b>×12</b>"]
    B3 --> B4["<b>कुल = 48</b>"]
    C --> C1["अवग्रह, ईहा, अवाय, धारणा → <b>4</b>"]
    C1 --> C2["पाँचों इन्द्रियों एवं मन से → <b>×6</b>"]
    C2 --> C3["12 प्रकार के पदार्थ → <b>×12</b>"]
    C3 --> C4["<b>कुल = 288= 336</b>"]

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ज्ञान की उत्पत्ति का क्रम
चक्षु को छोड़कर
शेष चार इन्द्रियाँ
अचक्षुदर्शन → व्यञ्जनावग्रह → अर्थावग्रह →
ईहा → अवाय → धारणा
चक्षु इन्द्रिय चक्षुदर्शन → अर्थावग्रह → ईहा → अवाय → धारणा
मन अचक्षु दर्शन → अर्थावग्रह → ईहा → अवाय → धारणा

Reference : Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-ChabdaLink


Questions and Answers: शङ्का -समाधान
समाधान : आगम और युक्ति से जाना जाता है कि चक्षु-इन्द्रिय अप्राप्यकारी है। आगम से श्रोत्र स्पष्ट शब्द को सुनता है, नेत्र अस्पष्ट रूप को ही देखता है तथा घ्राण, रसना और स्पर्शन इन्द्रियाँ क्रम से स्पष्ट गन्ध, रस और स्पर्श को ही जानती हैं।

उत्तर : अप्राप्यकारी होने से चक्षु और मन से व्यंजनावग्रह का अभाव है क्योंकि चक्षु अप्राप्त, दूरस्तिथ योग्य सन्नीकर्ष देश में अवस्थित और बाह्य प्रकाश से अभीव्यक्त पदार्थ को जानती है और मन भी अप्राप्त अर्थ को जानता है इसलिए इन दोनों से व्यंजनावग्रह नहीं होता है।



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 17-Dec-2025.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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