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Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 13

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – दानलाभभोगोपभोगवीर्याणाम् ॥१३॥सूत्रार्थ– दान, लाभ, भोग, उपभोग और वीर्य- इनके पाँच अन्तराय हैं ॥१३॥ भावार्थ अर्थ : दानान्तराय, लाभान्तराय, भोगान्तराय, उपभोगान्तराय और वीर्यान्तराय ये…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 12

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – उच्चैर्नीचैश्च ॥१२॥सूत्रार्थ– उच्चगोत्र और नीचगोत्र- ये दो गोत्रकर्म हैं ॥१२॥ भावार्थ अर्थ : गोत्र कर्म के दो भेद हैं– उच्च गोत्र और नीच…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 11

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – गति-जाति-शरीराङ्गोपाङ्-निर्माण-बन्धन-संघात-संस्थान-संहनन-स्पर्श-रस-गन्ध-वर्णानुपूर्वीगुरुलघुपघात-   परघातातातपोद्योतोच्छ्वास-विहायोगतयःप्रत्येकशरीर-त्रस-सुभग सुस्वर शुभ-सूक्ष्म-पर्याप्ती-स्थिरादेय-यशःकीर्ती-सेतराणी तीर्थंकरत्व च ॥११॥सूत्रार्थ– गति, जाति, शरीर, अंगोपांग, निर्माण, बन्धन, संस्थान, संहनन, स्पर्श, रस, गन्ध, वर्ण, आनुपूर्वी, अगुरुलघु, उपघात, परघात,…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 10

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – नारकतैर्यंग्योनमानुषदैवानि ॥१०॥सूत्रार्थ– नरकायु, तिर्यंचायु, मनुष्यायु और देवायु- ये चार आयु हैं ॥१०॥ भावार्थ अर्थ : नारक, तिर्यंच, मनुष्य और देव ये चार आयु…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 39

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – विधि-द्रव्य-दातृ-पात्रविशेषात्तद्विशेषः ।।३९।।विधि, देय वस्तु, दाता और पात्र की विशेषता से उसकी विशेषता है।। ३९ ।। भावार्थ अर्थ : विधि द्रव्य, दाता और पात्र की…

Tattvartha Sutra – Chapter 7 – Sutra 38

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अनुग्रहार्थं- स्वस्यातिसर्गो दानम् ॥३८॥सूत्रार्थ – अनुग्रहार्थ (निज व पर के कल्याण) के लिए अपनी वस्तु का त्याग करना दान है ।।३८।। भावार्थ अपने…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 9

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – दर्शनचारित्रमोहनीयाकषायकषायवेदनीयाख्यास्त्रिद्विनवषोडशभेदा: सम्यक्त्वमिथ्यात्वतदुभयान्यकषायकषायौ हास्यरत्यरतिशोक-भयजुगुप्सास्त्रीपुन्नपुंसकवेदा अनन्तानुबन्ध्यप्रत्याख्यान- प्रत्याख्यानसंज्वलनविकल्पाश्चैकशः क्रोधमानमायालोभा ॥९॥सूत्रार्थ– दर्शनमोहनीय, चारित्रमोहनीय, अकषायवेदनीय और कषाय वेदनीय– इनके क्रम से नौ, दो, नौ और सोलह भेद हैं।…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 8

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सदसद्वेद्ये ॥८॥सूत्रार्थ– सद्वेद्य और असत्‍वेद्य– ये दो वेदनीय हैं ॥८॥ भावार्थ अर्थ : वेदनीय के दो भेद हैं साता और असाता। जिनके उदय…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 7

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – चक्षुरचक्षुरवधि-केवलानां निद्रा-निद्रानिद्रा-प्रचला-प्रचलाप्रचला-स्त्यानगृद्धश्च ॥७॥सूत्रार्थ– चक्षुदर्शन, अचक्षुदर्शन, अवधिदर्शन और केवलदर्शन – इन चारों के चार आवरण तथा निद्रा, निद्रा-निद्रा, प्रचला, प्रचला-प्रचला और स्त्यानगृद्धि – ये…

Tattvartha Sutra – Chapter 8 – Sutra 6

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – मति-श्रुतावधि मन:पर्यय-केवलनाम् ॥६॥सूत्रार्थ– मतिज्ञान, श्रुतज्ञान, अवधिज्ञान, मन:पर्ययज्ञान और केवलज्ञान- इनको आवरण करनेवाली कर्म पाँच ज्ञानावरण है ॥६॥ भावार्थ अर्थ : मति ज्ञानावरण, श्रुत…