Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 29
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – एकसमयाऽविग्रहा ।।२९।।सूत्रार्थ– एक समयवाली गति विग्रहरहित होती है ।।२९।। भावार्थ अर्थ– बिना मोड़े वाली गति में एक समय लगता है। इसी को ऋजुगति…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – एकसमयाऽविग्रहा ।।२९।।सूत्रार्थ– एक समयवाली गति विग्रहरहित होती है ।।२९।। भावार्थ अर्थ– बिना मोड़े वाली गति में एक समय लगता है। इसी को ऋजुगति…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तद्विगुणद्विगुणा हृदाः पुष्कराणि च।।१८।।सूत्रार्थ– आगे के तालाब और कमल दूने-दूने हैं ||१८|| भावार्थ अर्थ– (ह्रदाः पुष्करिणी च) आगे के तालाब और कमल क्रम से…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तन्मध्ये योजनं पुष्करम् ।।१७।। इसके बीच में एक योजन का कमल है ।।१७ || भावार्थ अर्थ– (तन्मध्ये) पद्म सरोवर के बीच (योजनम्) एक योजन…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – दशयोजनावगाहः।।१६।।सूत्रार्थ तथा सयोजन गहरा है।।१६।। भावार्थ अर्थ पहला सरोवर दस योजन गहरा है। Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf English Meaning: The depth (avagāha) of the first…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – विग्रहवती च संसारिणः प्राक्चतुर्भ्यः ।।२८।।सूत्रार्थ – संसारी जीव की गति विग्रहरहित और विग्रहवाली होती है। उसमें विग्रहवाली गति चार समय से पहले अर्थात्…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – प्रथमो योजनसहस्रायामस्तदर्धविष्कम्भो हृदः ।।१५।।सूत्रार्थ– पहला सरोवर एक हजार (१०००) योजन लंबा और पाँच सौ (५००) योजन चौड़ा है। भावार्थ अर्थ– (प्रथमः ह्रदः) पहला…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अविग्रहा जीवस्य ।।२७।।सूत्रार्थ– मुक्त जीव की गति विग्रहरहित होती है ।।२७।। भावार्थ अर्थ– मुक्त जीव की गति मोड़े रहित होती है। अर्थात् मुक्त…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – पद्ममहापद्मतिगिञ्छकेसरि महापुण्डरीक पुण्डरीका ह्रदास्तेषामुपरि ॥१४॥सूत्रार्थ– इन पर्वतों के ऊपर क्रमशः पद्म, महापद्म, तिगिञ्छ, केसरी, महापुण्डरीक तथा अर्थ पुण्डरीक नामके हद हैं। भावार्थ अर्थ–…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अनुश्रेणी गति: ।।२६।।सूत्रार्थ– गति श्रेणी के अनुसार होती है ।।२६।। भावार्थ अर्थ– लोक के मध्य से लेकर ऊपर, नीचे और तिर्यक दिशा में…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – विग्रहगतौ कर्मयोगः ।।२५।।सूत्रार्थ– विग्रहगति में कार्मण काययोग होता है ।।२५।। भावार्थ अर्थ– ‘विग्रह’ शब्द के दो अर्थ हैं। विग्रह अर्थात् शरीर; शरीर के…