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Tattvartha Sutra – Chapter 3 – Sutra 22

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – शेषास्त्वपरगाः ॥२२॥सूत्रार्थ – किन्तु शेष नदियाँ पश्चिम समुद्र को जाती हैं ।।२२।। भावार्थ अर्थ : दो दो नदियों में से पीछे वाली नदी…

Tattvartha Sutra – Chapter 3 – Sutra 21

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – द्वयोर्द्वयोः पूर्वाः पूर्वगाः ॥२१॥सूत्रार्थ – दो-दो नदियों में से पहली-पहली नदी पूर्व समुद्र को जाती है।।२१।। भावार्थ अर्थ: (ये चौदह नदियाँ दो के…

Tattvartha Sutra – Chapter 3 – Sutra 20

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – गंगासिन्धुरोहिद्रोहितास्याहरिद्धरिकान्तासीतासीतोदा- नारीनरकान्तासुवर्णरूप्यकूलारक्तारक्तोदाः सरितस्तन्मध्यगाः ॥२०॥सूत्रार्थ– (भरत में) गंगा, सिन्धु, (हैमवत में) रोहित, रोहितास्या, (हरिक्षेत्र में) हरित्, हरिकान्ता, (विदेह में) सीता, सीतोदा, (रम्यक् में) नारी,…

Tattvartha Sutra – Chapter 3 – Sutra 19

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तन्निवासिन्यो देव्यः श्रीहीधृतिकीर्तिबुद्धिलक्ष्म्यः पल्योपमस्थितयः ससामानिक परिषत्काः ।।१९।।सूत्रार्थ– इनमें श्री, ही, धृति, कीर्ति, बुद्धि और लक्ष्मी- ये देवियाँ सामानिक और परिषद् देवों के साथ…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 35

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – शेषाणां सम्मूर्छनम् ।।३५।।सूत्रार्थ– शेष सब जीवों का सम्मूर्छन जन्म होता है ।।३५।। भावार्थ अर्थ– गर्भ जन्म वाले मनुष्य तिर्यंचों और उपपाद जन्म वाले…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 34

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – देवनारकाणामुपपातः ।।३४।।सूत्रार्थ– देव और नारकियों का उपपाद जन्म होता है ।।३४।। भावार्थ अर्थ– देवों और नारकियों के उपपाद जन्म ही होता है ।।३४।।Reference:…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 33

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – जरायुजाण्डजपोतानां गर्भः ।।३३।।सूत्रार्थ– जरायुज, अण्डज और पोत जीवों का गर्भजन्म होता है ।।३३।। भावार्थ अर्थ– जरायुज, अण्डज और पोत इन तीन प्रकार के…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 32

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सचित्तशीतसंवृता: सेतरा मिश्राश्चैकशस्तद्योनयः ।।३२।।सूत्रार्थ– सचित्त, शीत और संवृत्त तथा इनकी प्रतिपक्षभूत अचित्त, उष्ण और विवृत तथा मिश्र अर्थात् सचित्ताचित्त, शीतोष्ण और संतप्तविवृत- ये…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 31

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सम्मूर्छनगर्भौपपादा जन्म ।।३१।।सूत्रार्थ– सम्मूचर्छन, गर्भ और उपपाद- ये (तीन) जन्म हैं ।।३१।। भावार्थ अर्थ– जन्म तीन प्रकार का है- सम्मूर्छन जन्म, गर्भ जन्म…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 30

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – एकं द्वौ त्रिन्वाऽनाहारकः ।।३०।।सूत्रार्थ– एक, दो या तीन समय तक जीव अनाहारक रहता है ।।३०।। भावार्थ अर्थ– विग्रह गति में जीव एक समय,…