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Tattvartha Sutra – Chapter 3 – Sutra 13

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – मणिविचित्रपार्श्वो उपरि मूले च तुल्यविस्ताराः ।।१३।। सूत्रार्थ– इनके पार्श्व मणियों से चित्र-विचित्र हैं तथा वे ऊपर, मध्य और मूल में समान विस्तारवाले हैं। भावार्थ…

Tattvartha Sutra – Chapter 3 – Sutra 12

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – हेमार्जुनतपनीयवैडूर्य्य रजतहेममयाः।।१२।।सूत्रार्थ– ये छहों पर्वत क्रम से सोना, चाँदी, तपाया हुआ सोना, वैडूर्यमणि, चाँदी और सोना इनके समान रंगवाले हैं। भावार्थ अर्थ: हिमवान्…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 24

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – संज्ञिनः समनस्काः ।।२४।।सूत्रार्थ – मनवाले जीव संज्ञी होते हैं ।।२४।। भावार्थ अर्थ– मन सहित जीवों को संज्ञी कहते हैं। अतः मन रहित जीव…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 23

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – भावार्थ अर्थ– कृमि आदि के एक-एक इन्द्रिय अधिक होती है। अर्थात् लट, शंख, जोंक वगैरह के स्पर्शन और रसना, ये दो इन्द्रियाँ होती…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 22

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – वनस्पत्यन्तानामेकम् ।।२२।।सूत्रार्थ– वनस्पतिकायिक तक के जीवों के एक अर्थात् प्रथम इन्द्रिय होती है ।।२२।। भावार्थ अर्थ: पृथ्वी काय से लेकर वनस्पति काय पर्यन्त…

Tattvartha Sutra– Chapter 3 – Sutra 10

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – भरत-हैमवत-हरि-विदेह रम्यक हैरण्यवतैरावत-वर्षा: क्षेत्राणि ॥ १०॥सूत्रार्थ– जम्बूद्वीप में भरत, हैमवत, हरि, विदेह, रम्यक, हैरण्यवत और ऐरावत ये सात क्षेत्र हैं। भावार्थ अर्थ :…

Tattvartha Sutra – Chapter 3 – Sutra 11

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तद्विभाजिनः पूर्वापरायता हिमवन्महाहिमवन्निषधनीलरुक्मि-शिखरिणो वर्षधरपर्वताः ।।११।।सूत्रार्थ– उन क्षेत्रों को विभाजित करने वाले और पूर्व- पश्चिम लम्बे ऐसे हिमवान, महाहिमवान, निषध, नील, रुक्मी और शिखरी- ये…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 21

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – श्रुतमनिन्द्रियस्य ।।२१।।सूत्रार्थ– श्रुत मन का विषय है ।।२१।। भावार्थ अर्थ: अनिन्द्रिय अर्थात् मन और श्रुत अर्थात् श्रुत ज्ञान का विषयभूत पदार्थ। श्रुतज्ञान का…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 20

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – स्पर्शरसगन्धवर्णशब्दास्तदर्थाः ।।२०।।सूत्रार्थ– स्पर्शन, रस, गन्ध, वर्ण और शब्द- ये क्रम से उन इन्द्रियों के विषय हैं ।।२०।। भावार्थ अर्थ: स्पर्शन इन्द्रिय का विषय…

Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 19

Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – स्पर्शनरसनघ्राणचक्षुःश्रोत्राणि।।१९।।सूत्रार्थ– स्पर्शन, रसना, घ्राण, चक्षु और श्रोत्र- ये पाँच इन्द्रियाँ हैं ।।१९।। भावार्थ अर्थ: वीर्यान्तराय और मतिज्ञानावरण कर्म का क्षयोपशम होने से तथा…