Tattvartha Sutra – Chapter 2 – Sutra 43
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तदादीनि भाज्यानि युगपदेकस्मिन्नाचातुर्भ्यः ।।४३।।सूत्रार्थ– एक साथ एक जीव के तैजस और कार्मणि से लेकर चार शरीर तक विकल्प से होते हैं ।।४३।। भावार्थ…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – तदादीनि भाज्यानि युगपदेकस्मिन्नाचातुर्भ्यः ।।४३।।सूत्रार्थ– एक साथ एक जीव के तैजस और कार्मणि से लेकर चार शरीर तक विकल्प से होते हैं ।।४३।। भावार्थ…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – सर्वेषाम् ।।४२।।सूत्रार्थ– तथा सब संसारी जीवों के होते हैं ।।४२।। भावार्थ अर्थ– ये दोनों शरीर सभी संसारी जीवों के होते हैं ।।४२।।Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अनादिसम्बन्धे च ।।४१।।सूत्रार्थ– आत्मा के साथ अनादि सम्बन्ध वाले हैं ।।४१।। भावार्थ अर्थ– यहाँ ‘च’ शब्द विकल्पार्थक है। अतः आत्मा से तैजस और…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अप्रतिघाते ।।४०।।सूत्रार्थ– प्रतिघात रहित है ।।४०।। भावार्थ अर्थ– तैजस और कार्मण शरीर अप्रतिघाती हैं। अर्थात् जैसे अग्नि लोहे के पिंड में घुस जाती…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – अनन्तगुणे परे ।।३९।।सूत्रार्थ– परवर्ती दो शरीर प्रदेशों की अपेक्षा उत्तरोत्तर अनन्तगुणे हैं ।।३९।। भावार्थ अर्थ– आहारक शरीर से तैजस में अनंतगुणे परमाणु होते…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – प्रदेशतोऽसंख्येयगुणं प्राक् तैजसात् ।।३८।।सूत्रार्थ– तैजस से पूर्व तीन शरीरों में आगे-आगे का शरीर प्रदेशों की अपेक्षा असंख्यागुणा है ।।३८।। भावार्थ अर्थ– यहाँ प्रदेश…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – परं परं सूक्ष्मम् ।।३७।।सूत्रार्थ– आगे-आगे का शरीर सूक्ष्म है ।।३७।। भावार्थ अर्थ– औदारिक से आगे-आगे के शरीर सूक्ष्म होते हैं अर्थात् औदारिक से…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – भरतः षड्विंशतिपञ्चयोजनशतविस्तारः षट्चैकोनविंशतिभागायोजनस्य ||२४||सूत्रार्थ– भरत क्षेत्र का विस्तार पाँच सौ छब्बीस सही छह बटे उन्नीस योजन है ||२४|| भावार्थ अर्थ : भरत क्षेत्र…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – औदारिकवैक्रियिकाहारकतैजसकार्मणानि शरीराणि ।।३६।।सूत्रार्थ– औदारिक, वैक्रियिक, आहारक, तैजस और कार्मणि – ये पाँच शरीर हैं ।।३६।। भावार्थ अर्थ– औदारिक, वैक्रियिक, आहारक, तैजस और कार्मणि…
Acharya Shri UmaswatiRead About Acharya Umaswamihere – चतुर्दश- नदी- सहस्र परिवृता गङ्गा-सिन्ध्वादयो नद्यः ॥२३॥सूत्रार्थ– गंगा और सिन्धु आदि नदियों की चौदह चौदह हजार परिवार नदियाँ हैं ||२३|| भावार्थ अर्थ: गंगा और…