
Acharya Shri Umaswati
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Sutra
स्निग्ध- रूक्षत्वाद्बन्धः ॥३३॥
Meaning
चिकनाई और रूखापन के निमित्त से परमाणुओं का परस्पर बन्धहोता बन्ध अनेक पदार्थों में एकपने का ज्ञान करने वाले सम्बन्ध विशेष को बन्ध कहते हैं॥३३॥


भावार्थ
पुद्गलों में स्नेह और रूक्ष गुण पाए जाते हैं । किन्हीं परमाणुओं में रूक्ष गुण होता है और किन्हीं परमाणुओं में स्नेह गुण होता है। स्नेह गुण के अविभागी प्रतिच्छेद बहुत से होते हैं। इसी तरह रूक्ष गुण के अविभागी प्रतिच्छेद भी बहुत होते हैं। शक्ति के सबसे जघन्य अंश को अविभागी प्रतिच्छेद कहते हैं। एक-एक परमाणु में अनन्त अविभागी प्रतिच्छेद होते हैं और वे घटते बढ़ते रहते हैं। किसी समय अनन्त अविभागी प्रतिच्छेद से घटते घटते असंख्यात अथवा संख्यात अथवा और भी कम अविभागी प्रतिच्छेद रह जाते हैं। और कभी बढ़कर, संख्यात, असंख्यात अथवा अनन्त अविभागी प्रतिच्छेद हो जाते हैं। इस तरह परमाणुओं में स्निग्धता और रूक्षता हीन या अधिक पाई जाती है जिसका अनुमान हम स्कन्धों को देखकर कर सकते हैं। जैसे जल से बकरी के दूध घी में, बकरी के दूध घी से गौ के दूध घी में, गौ के दूध घी से भैंस दूध घी में और भैंस के दूध घी से ऊँटनी के दूध घी में चिकनाई अधिक पाई जाती है। इसी तरह धूल से रेत में और रेत से बजरी में रूखापन अधिक पाया जाता है। वैसे ही परमाणुओं में भी चिकनाई और रुखाई कमती बढ़ती होती है। वही पुद्गलों के बंध में कारण हैं ॥ ३३ ॥
Reference: TatvarthaSutra_KailashChandra_Shastri_तत्वार्थसूत्रपंडितकैलाशचंद्रशास्त्री
English Meaning:
Combination of atoms takes place by virtue of their greasiness (snigdhatva) and roughness (rūksatva). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
बंध
(अनेक पदार्थों में एकपन का ज्ञान कराने वाला संबंध विशेष)
flowchart TB A["बंध"] A --> C A --> D A --> E C["पुद्गल का<br/>पुद्गल से"] D["जीव का<br/>रागादि विकारी भावों से"] E["जीव का पुद्गल<br/>(कर्म-नोकर्म) से"] C --> C1 D --> D1 E --> E1 C1["स्पर्श गुण के<br/>कारण संयोग संबंध<br/>(यहाँ ये बन्ध विवक्षित है)"] D1["संयोग संबंध"] E1["एक क्षेत्र अवगाह संबंध"]
Questions and Answers: शङ्का -समाधान
Answer बाह्य अभ्यन्तर कारणों के कारण स्नेह पर्याय की प्रकटता से जो चिकनापना है वह स्नेह है ।
Reference:Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
Answer नहीं, पुद्गल द्रव्य के स्पर्श गुण की पर्याय विशेष होने से स्निग्ध और रूक्षगुण (अवस्था) की सिद्धि होती है।
Reference:Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
- Tatvartha_Sutra_Muni_Sudhasagarji_तत्वार्थसूत्रमुनिसुधासागर_जी
- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
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Diksha Jain created this page on 13-feb-2026
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