
Acharya Shri Umaswati
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Sutra
उत्पादव्ययध्रौव्य-युक्तं सत् ॥ ३०॥
Meaning
(उत्पादव्ययध्रौव्ययुक्तम्) जो उत्पाद, व्यय और ध्रौव्य सहित होता है। वह (सत्) सत् है ॥ ३०॥


भावार्थ
जो उत्पाद, व्यय और ध्रौव्य सहित हो वह सत् है । उत्पाद – द्रव्य में नवीन पर्याय की उत्पत्ति को उत्पाद कहते हैं जैसे मिट्टी की पिण्ड पर्याय से घट की उत्पत्ति । व्यय – पूर्वपर्याय के विनाश को व्यय कहते हैं जैसे घटपर्याय उत्पन्न होने पर पिण्डपर्याय का व्यय । ध्रौव्य – दोनों पर्यायों में मौजूद रहने को ध्रौव्य कहते हैं । जैसे पिण्ड तथा घट पर्याय में मिट्टी का धौव्यपना ॥ ३० ॥ Reference:Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
English Meaning:
Existence (sat) is with ( yukta) origination (utpāda), destruction (vyaya) and permanence (dhrauvya). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
द्रव्य लक्ष्य
flowchart TB
A["द्रव्य (लक्ष्य)"]
B["सत् (लक्षण)"]
A --> B
B --> C["उत्पाद<br/>(नवीन पर्याय की उत्पत्ति)"]
B --> D["व्यय<br/>(पूर्व पर्याय का नाश)"]
B --> E["ध्रौव्य<br/>(प्रगटज्ञान को कारणभूत द्रव्य की किसी अवस्था की नित्यता)"]द्रव्य आधार
flowchart TB
A["द्रव्य आधार"]
B["उत्पाद स्वरूप<br/>ही हो"]
C["व्यय स्वरूप<br/>ही हो"]
D["ध्रौव्य स्वरूप<br/>ही हो"]
E["उत्पाद–व्यय<br/>रूप ही हो"]
A --> B
A --> C
A --> D
A --> E
B --> B1["तो असत् का<br/>उत्पाद हो"]
B1 --> B2["मिट्टी बिना घट<br/>की उत्पत्ति हो"]
C --> C1["तो विश्व शून्य<br/>को प्राप्त हो"]
C1 --> C2["घट के नाश<br/>पर मिट्टी का नाश हो"]
D --> D1["प्रत्यक्ष से विरोध हो,<br/>क्योंकि अवस्था<br/>बदलती दिखाई देती है"]
D1 --> D2["मिट्टी की अवस्था<br/>घट रूप न हो"]
E --> E1["ध्रौव्य बिना<br/>दोनों का मेल कैसे हो"]
E1 --> E2["मिट्टी के पिंड और घट के आधार रूप मिट्टी न हो,<br/>तो वे दोनों भी नहीं हो सकते"]द्रव्
flowchart TB
A["द्रव्य"]
B["तीन रूप<br/>(भेद से)"]
C["एक रूप<br/>(अभेद से)"]
A --> B
A --> C
B --> B1["उत्पाद"]
B --> B2["व्यय"]
B --> B3["ध्रौव्य"]
C --> C1["सत् रूप"]
| लक्ष्य और लक्षण का भेद है”] | उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य पृथक नहीं हो सकते, इसलिए एक हैं। |
| नाम, संख्या, स्वरूप, प्रयोजन से भेद | उत्पाद-व्यय-ध्रौव्य प्रदेश से एक हैं”] |
सत्ता
flowchart TB
A["सत्ता"]
B["महासत्ता<br/>(साधारण अस्तित्व)<br/>(जो भी है, वह सब सत् रूप है)"]
C["अवांतर सत्ता<br/>(स्वरूप अस्तित्व)<br/>(जो भी है, वह अपने-अपने भिन्न-भिन्न स्वरूप से है)"]
A --> B
A --> CQuestions and Answers: शङ्का -समाधान
Answer पूर्व पर्याय के विनाश को व्यय कहते हैं। स्वजाति को न छोड़ते हुए चेतन वा अचेतन पदार्थ की पूर्व पर्याय का जो नाश होता है, वह व्यय है जैसे कि घट की उत्पत्ति होने पर मिट्टी के पिण्डाकार का नाश होता है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
Answer द्रव्य अपनी जाति को तो कभी नहीं छोड़ते फिर भी उनकी अन्तरंग और बहिरंग निमित्त के वश से प्रति समय जो नवीन अवस्था की प्राप्ति होती है, उसे उत्पाद कहते हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
- Tatvartha_Sutra_Muni_Sudhasagarji_तत्वार्थसूत्रमुनिसुधासागर_जी
- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
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Diksha Jain created this page on 12-feb-2026
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