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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
आकाशस्यानन्ताः ॥ ९ ॥
Meaning
आकाश द्रव्य के अनंत प्रदेश हैं । अर्थात् यद्यपि आकाश एक अखंड द्रव्य है किंतु यदि उसे परमाणु के द्वारा मापा जाए तो वह अनंत परमाणुओं के फैलाव के बराबर होता है। इससे उसे अनंत प्रदेशी कहा है ॥ ९ ॥

भावार्थ

 आकाश द्रव्य के अनन्तप्रदेश हैं। परन्तु लोकाकाश के असंख्यात ही प्रदेश हैं।Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

English Meaning:

The substance of space (ākāśadravya) has infinite (ananta) space-points (pradeśa). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain



Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer  जीवराशि के अनन्तवें भाग प्रमाण सिद्ध राशि है, सिद्धों से अनन्त गुणी निगोद राशि है। इससे अनन्त गुणी पुद्गल राशि है। इससे अनन्तगुणे काल के समय हैं। इनसे भी अनन्तगुणे आकाश के प्रदेश हैं। आकाश के अनन्त प्रदेश हैं ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer जो वस्तु जिस रूप से व्यवस्थित है उसको उसी रूप से जानना प्रमाण वा स्वभाव होने जिस प्रकार प्रमाण संख्यात – असंख्यात को संख्यात – असंख्यात रूप से जानता है उसी प्रकार अनन्त को (आकाश के अनन्त प्रदेशों को ) अनन्त रूप से जानता है । इसमें कोई विरोध नहीं है इसलिए आकाश के अनन्त प्रदेश होते हैं, यह बहुत अच्छा कहा गया है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 11-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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