
Acharya Shri Umaswati
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उत्तरा दक्षिणतुल्याः ॥२६॥
सूत्रार्थ– विदेह क्षेत्र से उत्तर के तीन पर्वत और तीन क्षेत्र, दक्षिण के पर्वत और क्षेत्रों के समान विस्तार वाले हैं ॥२६॥
भावार्थ
अर्थ: उत्तर के क्षेत्रों एवं पर्वतों का वर्णन (दक्षिणतुल्याः) दक्षिण के तुल्य है। अर्थ- उत्तर के क्षेत्र एवं पर्वतों का वर्णन दक्षिण के क्षेत्रों एवं पर्वतों के तुल्य है।
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf
English Meaning:
Those in the north are equal to those in the south.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain

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भरतादि क्षेत्र एवं हिमवान आदि पर्वतों का विस्तार
| क्रम | प्रकार | नाम | विस्तार (योजन) | नदियाँ |
|---|---|---|---|---|
| 1 | क्षेत्र | भरत | 526 6/19 | 28,000 |
| पर्वत | हिमवान | 1052 12/19 | — | |
| 2 | क्षेत्र | हैमवत | 2104 4/19 | 56,000 |
| पर्वत | महाहिमवान | 4210 10/19 | — | |
| 3 | क्षेत्र | हरि | 8421 8/19 | 1,12,000 |
| पर्वत | निषध | 16842 2/19 | — | |
| 4 | क्षेत्र | विदेह | 33684 4/19 | 2,24,000 |
| पर्वत | नील | 16842 2/19 | — | |
| 5 | क्षेत्र | रम्यक | 8421 8/19 | 1,12,000 |
| पर्वत | रुक्मिन् | 4210 10/19 | — | |
| 6 | क्षेत्र | हैरण्यवत | 2104 4/19 | 56,000 |
| पर्वत | शिखरिन् | 1052 12/19 | — | |
| 7 | क्षेत्र | ऐरावत | 526 6/19 | 28,000 |
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Questions and Answers: शङ्का -समाधान
समाधान: सूत्र में दिये गये ‘तुल्य’ शब्द से निषध पर्वत के समान नील पर्वत की, हरिक्षेत्र के समान रम्यक क्षेत्र का, महाहिमवान् पर्वत के समान रुक्मि पर्वत का, हैमवत क्षेत्र के समान हैरण्यवत क्षेत्र का, हिमवान् पर्वत के समान शिखरी पर्वत का तथा भरत क्षेत्र के समान ऐरावत क्षेत्र के विस्तार आदि को जानना चाहिए।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
उत्तर : सूत्र में दिये गये ‘उत्तरा’ पद से उत्तर में स्थित ऐरावत क्षेत्र, शिखरी पर्वत, हैरण्यवत क्षेत्र, रुक्मि पर्वत, रम्यक क्षेत्र, नील पर्वत, इन पर स्थित हद, हदों में स्थित कमल आदि की समानता लगा लेनी चाहिए।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
- Tatvartha_Sutra_Muni_Sudhasagarji_तत्वार्थसूत्रमुनिसुधासागर_जी
- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 6-feb-2026
Courtesy:
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