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Acharya Shri Umaswati
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शेषास्त्वपरगाः ॥२२॥
सूत्रार्थ – किन्तु शेष नदियाँ पश्चिम समुद्र को जाती हैं ।।२२।।


भावार्थ

अर्थ : दो दो नदियों में से पीछे वाली नदी पश्चिम समुद्र को जाती है। अर्थात् सिन्धु, रोहितास्या, हरिकांता, सीतोदा, नरकांता, रूप्यकूला और रक्तोदा, ये सात नदियाँ पश्चिम समुद्र में जाकर मिलती हैं।Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

The rest are the western rivers.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Video Pravachans

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: शेषनदियाँ किस दिशा में बहती हैं। इतर नदियों की दिशाविशेष का ज्ञान कराने के लिए यह सूत्र कहा गया है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर : पद्म सरोवर से उत्पन्न हुई और पूर्व तोरण द्वार से निकली हुई गङ्गा नदी है। पश्चिम तोरण द्वार से निकली हुई सिन्धु नदी है तथा उत्तर तोरण द्वार से निकली हुई रोहितास्या नदी है महापद्म तालाब से उत्पन्न हुई और दक्षिण तोरणद्वार से निकली हुई रोहित नदी है तथा उत्तर तोरण द्वार से निकली हुई हरिकान्ता नदी है, तिगिंच्छ तालाब से उत्पन्न हुई और दक्षिण तोरण द्वार से निकली हुई हरित् नदी है और उत्तर तोरण द्वार से निकली सीतोदा नदी है। केसरी तालाब से उत्पन्न हुई और दक्षिण तोरण द्वार से निकली हुई सीता नदी है। तथा उत्तर तोरण द्वार से निकली हुई नरकान्ता नदी है। महापुण्डरीक तालाब से उत्पन्न हुई और दक्षिण तोरण द्वार से निकली हुई नारी नदी है। तथा उत्तर तोरण द्वार से निकली हुई रूप्यकूला नदी है। पुण्डरीक तालाब से उत्पन्न हुई और दक्षिण तोरण द्वार से निकली हुई सुवर्णकूला नदी है। पूर्व तोरण द्वार से निकली हुई रक्ता नदी है और पश्चिम तोरण द्वार से निकली हुई रक्तोदा नदी है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



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Diksha Jain created this page on 6-feb-2026

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