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Acharya Shri Umaswati
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तद्विगुणद्विगुणा हृदाः पुष्कराणि च।।१८।।
सूत्रार्थ– आगे के तालाब और कमल दूने-दूने हैं ||१८||

भावार्थ

अर्थ– (ह्रदाः पुष्करिणी च) आगे के तालाब और कमल क्रम से (तद्वद्गुणगुणाः:) प्रथम तालाब से तथा उसके कमलों से दूने दूने विस्तार वाले (सन्ति) हैं।
Reference: Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्रबाब्रप्रदीप_पियूष.pdf

English Meaning:

The lakes as well as the lotuses on further mountains are each double the magnitude of the previous one.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain



Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: यद्यपि सूत्र में दिये गये ‘तत्’ शब्द से पद्म सरोवर का ही ग्रहण होता है, फिर भी व्याख्यान से विशेष अर्थ का बोध होता है। आगे “उत्तरा दक्षिणतुल्याः” सूत्र से भी इसी अर्थ का समर्थन होता है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर : महाहिमवन् पर्वत पर बहुमध्य प्रदेश में महापद्म सरोवर है । वह सरोवर दो हजार (२०००) योजन लंबा, एक हजार (१०००) योजन चौड़ा और बीस योजन गहरा है। उसके मध्य में जलतल भाग से दो कोस पर्यन्त ऊँचा और एक योजन मोटे पत्तों के समूह वाला महापद्म नामका कमल है । यह कमल दो कोस लंबे पत्तों से युक्त और एक योजन लंबी कर्णिका से शोभित दो योजन विस्तार वाला है। इस कमल के परिवार कमलों की संख्या पूर्वोक्त कमल प्रमाण एक सौ आठ (१०८) है और विशेष कमल पूर्वोक्त कमल के समान एक लाख चालीस हजार एक सौ पन्द्रह (१,४०,११५) हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



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Diksha Jain created this page on 5-feb-2026

Courtesy:
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