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Acharya Shri Umaswati
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समनस्कामनस्काः॥११॥
सूत्रार्थ: मनवाले और मनरहित ऐसे संसारी जीव हैं॥११॥

भावार्थ

अर्थ: संसारी जीव दो प्रकार के होते हैं- मन सहित और मन रहित। मनसहित जीवों को संज्ञी कहते हैं। संज्ञी जीव शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं, बुलाने पर आ जाते हैं और इशारे वगैरह को समझ लेते हैं। मन रहित जीवों को असंज्ञी कहते हैं। असंज्ञी जीव शिक्षा-उपदेश वगैरह ग्रहण नहीं कर सकते। इससे अमनस्क को सूत्र में पीछे रखा और समनस्क को पहले रखा है॥११॥
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

English Meaning:

The transmigrating souls are of two kinds, those with the mind – mana – and those without the mind.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


जीव
flowchart TB
    A["जीव"] --> B["संसारी<br>(कर्म सहित)"] & C["मुक्त<br>(कर्म रहित)"]
    B --> D["समनस्क<br><br>* मन सहित<br>* स्वामी – चारों गति के जीव"] & E["अमनस्क<br><br>* मन रहित<br>* स्वामी – स्थिर तिर्यंच"]

    style A fill:#FF6D00
    style B fill:#FFE0B2
    style C fill:#FFF9C4
    style D fill:#FFE0B2
    style E fill:#FFF9C4
Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: कोई संसारी जीव समनस्क है क्योंकि शिक्षा, क्रिया, आलाप-ग्रहण आदि ज्ञान रूप कार्य की सिद्धि अन्यथा नहीं हो सकती। संसार में कोई जीव अमनस्क है क्योंकि शिक्षा आदि को ग्रहण नहीं करने वाले ज्ञान के होने स्वरूप कार्य की सिद्धि अन्यथा नहीं हो सकती है। दूसरी बात इष्ट विशेष से भी दो प्रकार के जीवों की सिद्धि हो जाती है। प्रकरण में इष्ट पद से प्रकृष्ट वचन आगम लिया जाता है। सर्वज्ञ की आम्नाय से चले आये आगम का विशेष ही समनस्क और अमनस्क जीवों को कहने वाला शास्त्र है।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: पृथक योग करने से संसारी का ही सैनी और असैनी के साथ सम्बन्ध है। यदि इस सूत्र में संसारी का सम्बन्ध नहीं होता तो ‘संसारिणो मुक्ताश्च समनस्कामनस्काः।’ ऐसा एक ही सूत्र कहते। अथवा आगे कहे जाने वाले ‘संसारीणस्त्रस्थावराः सूत्र से संसारी पद की प्रत्यासत्ति होने के कारण संसारीयों का बोध होता है। (अर्थात् ये संसारी जीवों के भेद हैं ऐसा जाना जाता है।)
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 4 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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