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Acharya Shri Umaswami
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मतिश्रुतयोर्निबन्धो द्रव्येष्वसर्वपर्यायेषु॥२६॥
 सूत्रार्थ – मतिज्ञान और श्रुतज्ञान की प्रवृत्ति कुछ पर्यायों से युक्त सब द्रव्यों में होती है।॥२६॥

भावार्थ

मतिज्ञान और श्रुतज्ञान के विषय का नियम द्रव्यों की कुछ पर्यायों में है। अर्थात ये दोनों ज्ञान द्रव्यों की कुछ पर्यायों को जानते हैं, सब पर्यायों को नहीं जानते।
Ref: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning

The subject matter (visaya) of clairvoyance (avadhijñāna) is substances with form (rūpī).
Ref: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान
समाधान: सूत्र में ‘द्रव्येषु’ यह विशेषण देने से मति-श्रुतज्ञान मात्र पर्यायों को ही नहीं जानते, द्रव्यों को भी जानते हैं, इससे केवल पर्यायों को ही मानने वालों के मत का खण्डन किया है। तथा ‘असर्वपर्यायेषु’ विशेषण से मतिश्रुत ज्ञान मात्र द्रव्य को ही नहीं जानते है, पर्यायों को भी जानते हैं, इससे मात्र द्रव्य को मानने वालों के मत का खण्डन किया है।

उत्तर : यद्यपि इस सूत्र में विषय स्पष्ट नहीं है, किन्तु पूर्व सूत्र ‘विशुद्धिक्षेत्र —’ (२६) में कहे गये ‘विषय’ शब्द का प्रयोजनवश अनुवर्तन कर लेने से यह जान लिया जाता है कि इस सूत्र में मतिश्रुत ज्ञान का विषय बताया गया है।



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on 12-Dec-2025.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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