
Acharya Shri Umaswati
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Sutra
सोऽनन्त – समयः ॥४०॥
Meaning
यह कालद्रव्य अनन्त समय वाला है॥४०॥


भावार्थ
भूत, भविष्यत् और वर्तमान ये व्यवहार काल के भेद हैं । सो वर्तमान काल का प्रमाण तो एक समय है, क्योंकि एक समय के समाप्त होने पर वह भूत हो जाता है और जो दूसरा समय उसका स्थान लेता है वह वर्तमान कहलाता है किन्तु भूत और भविष्यत् काल अनन्त समय वाला है । इसी से व्यवहार काल को अनन्त समय वाला कहा है। अथवा यह सूत्र मुख्य काल का ही प्रमाण बतलाता है, क्योंकि एक कालाणु अनन्त पर्यायों की वर्तना में कारण है इसलिए उपचार से कालाणु को अनन्त कह सकते हैं। काल के सबसे सूक्ष्म अंश का नाम समय है और समयों के समूह का नाम आवली घड़ी है। वह सब व्यवहार काल है, जो मुख्य काल द्रव्य की ही पर्याय रूप है ॥४०॥
Reference: TatvarthaSutra_KailashChandra_Shastri_तत्वार्थसूत्रपंडितकैलाशचंद्रशास्त्री
English Meaning:
It (the conventional time) consists of infinite (ananta) instants (samaya). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
काल भी द्रव्य है
flowchart TB
A["काल भी द्रव्य है"]
A --> B["इसलिए"]
B --> C1["सत् स्वरूप"]
B --> C2["उत्पाद–व्यय–ध्रौव्य सहित"]
B --> C3["गुण–पर्याय वाला"]
C2 --> D["और"]
D --> E1["अचेतन"]
D --> E2["नित्य"]
D --> E3["अवस्थित"]
D --> E4["अमूर्तिक"]
D --> E5["निष्क्रिय"]
D --> E6["1 प्रदेशी<br/>(अकायवान)<br/>मुख्य–गौण दोनों प्रकार से"]
| निश्चय काल | व्यवहार काल |
|---|---|
| * द्रव्य | * निश्चय काल द्रव्य की पर्याय |
| * कालाणु | * समय, घंटा, दिन आदि |
| * लोक प्रमाण असंख्यात कालाणु | * अनंत पर्यायें (भूत, वर्तमान, भविष्य मिलाकर) |
| 1. काल है ? | 1. क्योंकि सभी द्रव्यों के परिणामन में साधारण कारण की आवश्यकता अनिवार्य है। |
| 2. कालाणु एक प्रदेशी ही क्यों ? |
2. * जितनी बड़ी पर्याय होती है, उतना द्रव्य इसलिए काल की समय पर्याय जितना 1 प्रदेशी कालाणु है। * मंदगति से गमन करते पुद्गल परमाणु को एक आकाश प्रदेश ही सहायक होता है। |
| 3. हर प्रदेश पर एक ही क्यों ? | 3. वर्णा उस प्रदेश के द्रव्यों (विशेष रूप से 1 परमाणु) का परिणामन कैसे हो ! |
प्रचय के भेद
flowchart TB
A["प्रचय के भेद"]
A --> B["तिर्यक् प्रचय<br/>(प्रदेशों का समूह)"]
A --> C["ऊर्ध्व प्रचय<br/>(पर्यायों का समूह)"]
B --> E["तिर्यक् प्रचय नहीं होता है"]
C --> F["ऊर्ध्व प्रचय होता है<br/>(समय रूप पर्याय का)"]

शेष द्रव्य
flowchart TB A[शेष द्रव्य] A --> B[दोनों प्रकार के प्रत्यय होते हैं।] C[परमाणु के तिर्यक् प्रत्यय नहीं होता।]
Questions and Answers: शङ्का -समाधान
Answer वर्तना लक्षण वाले मुख्य काल का प्रमाण कहा । परन्तु परिणाम आदि के द्वारा जानने योग्य व्यवहार काल का क्या प्रमाण है ? इस बात का ज्ञान कराने के लिए यह सूत्र कहा गया है
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
Answer मुख्य परमार्थ कालाणु धर्मास्तिकाय के प्रदेश के समान असंख्यात है, ऐसा कहा है। परन्तु यहाँ अनन्त समय का निर्देश व्यवहार काल के प्रमाण की अवधारणा के लिए है।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
- Tatvartha_Sutra_Muni_Sudhasagarji_तत्वार्थसूत्रमुनिसुधासागर_जी
- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
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Diksha Jain created this page on 13-feb-2026
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