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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
गुणपर्ययवद् द्रव्यम् ॥ ३८॥
Meaning
जिसमें गुण और पर्याय पाई जाती है उसे द्रव्य कहते हैं॥ ३८॥

भावार्थ

द्रव्य में अनेक परिणमन होने पर भी जो द्रव्य से भिन्न नहीं होता, सदा द्रव्य के साथ ही रहता है वह गुण है। इसी से गुण को अन्वयी कहा गया है। और जो द्रव्य में आती जाती रहती है वह पर्याय है इसी से पर्याय को व्यतिरेकी कहा है। गुण पर्याय रूप ही द्रव्य है । जैसे, ज्ञान आदि जीव के गुण हैं और रूप आदि पुद्गल के गुण हैं। न ज्ञान जीव को छोड़कर रह सकता है और न रूप आदि गुण पुद्गल को छोड़कर रह सकते हैं। हाँ, ज्ञान गुणों में भी परिणमन होता है जैसे घटज्ञान, पटज्ञान। और रूप आदि में भी परिणमन होता है। यह परिणमन ही पर्याय है। पहले द्रव्य का लक्षण सत् कहा था और सत् का लक्षण उत्पाद व्यय और धौव्य से जो युक्त हो वही सत् है। ऐसा कहा था। यहाँ गुण पर्यायवान को द्रव्य कहा है। इन दोनों लक्षणों में कोई अंतर नहीं है। एक के कहने से दूसरे का अन्तर्भाव हो जाता है, क्योंकि गुण ध्रुव होते हैं और पर्याय उत्पाद विनाशशील होती है। यदि द्रव्य में गुण न हो तो वह धौव्य युक्त नहीं हो सकता और यदि पर्याय न हो तो वह उत्पाद व्यययुक्त नहीं हो सकता । अतः जब हम कहते हैं कि द्रव्य धौव्ययुक्त है तो उसका मतलब होता है कि द्रव्य गुणवान् है । और जब उसे उत्पाद विनाश वाला कहते हैं तो उसका मतलब होता है कि वह पर्यायवान है। अतः दोनों लक्षण प्रकारान्तर से एक ही बात को कहते हैं । यहाँ इतना और समझ लेना चाहिए कि द्रव्य, गुण और पर्याय की सत्ता जुदी जुदी नहीं है किन्तु सबका अस्तित्व अथवा सत्ता एक ही है जो द्रव्य के नाम से कही जाती है। इसी से सत् को द्रव्य कहा है ॥ ३८ ॥ Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

That which has qualities (guna) and modes (paryāya) is a substance (dravya). Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


द्रव्य का अन्य प्रकार से लक्षण
द्रव्य का अन्य प्रकार से लक्षण
गुण – पर्यायवान
गुण पर्याय
• जो द्रव्य के सभी हिस्सों और सभी हालातों में पाया जाए

• ध्रौव्य रूप

• अन्वयी – बने रहना (वही का वही)

• सहभावी पर्याय
• जो उत्पन्न और नष्ट हो अथवा गुणों के विकार (विशेष कार्य)

• उत्पाद–व्यय रूप

• व्यतिरेकी – बदलना (भिन्न-भिन्न)

• क्रमवर्ती पर्याय
गुण
सामान्य गुण विशेष गुण
(जो सभी द्रव्यों में पाए जाएं)

जैसे –

अस्तित्व
वस्तुत्व
द्रव्यत्व
प्रमेयत्व
अगुरुलघुत्व
प्रदेशत्व
(जो सभी द्रव्यों में न पाए जाएं)

जैसे –

जीव का ज्ञान
पुद्गल का रूपीपना
धर्म का गतिहेतुत्व
अधर्म का स्थितिहेतुत्व
आकाश का अवगाहनहेतुत्व
काल का परिणामहेतुत्व
अन्य प्रकार से गुण
साधारण साधारण-असाधारण असाधारण
परिभाषा जो सभी द्रव्यों में पाए जाएँ जो सभी में नहीं, पर एक से अधिक द्रव्यों में पाए जाएँ जो अपने-अपने द्रव्य में ही पाए जाएँ
जैसे – अस्तित्व
वस्तुत्व
अमूर्तत्व
अचेतनत्व
ज्ञान, दर्शन
रस, गंध
सामान्य गुणों का स्वरूप
गुण का नाम स्वरूप
1. अस्तित्व गुण जिस शक्ति के कारण द्रव्य का कभी नाश न हो।
2. वस्तुत्व गुण द्रव्य में अर्थ क्रिया हो।
3. द्रव्यत्व गुण द्रव्य सर्वदा एक-सा न रहे और जिसकी पर्यायें हमेशा बदलती रहें।
4. प्रमेयत्व गुण द्रव्य किसी न किसी के ज्ञान का विषय हो।
5. अगुरुलघुत्व गुण द्रव्य की द्रव्यता कायम रहे,

एक द्रव्य दूसरे द्रव्य रूप न परिणमे,

एक गुण दूसरे गुण रूप न परिणमे,

एक द्रव्य के अनेक गुण बिखरकर जुड़े-जुड़े न हो जाएं।
6. प्रदेशत्व गुण द्रव्य का कुछ न कुछ आकार अवश्य हो।

पर्याय

flowchart TB

    A["पर्याय"]

    A --> B["व्यंजन पर्याय<br/>(प्रदेशल गुण का विकार)"]
    A --> C["अर्थ पर्याय<br/>(प्रदेशल के सिवाय शेष गुणों का विकार)"]

    B --> D["स्वभाव व्यंजन पर्याय<br/>(बिना किसी निमित्त के)"]
    B --> E["विभाव व्यंजन पर्याय<br/>(अन्य के निमित्त से)"]

    C --> F["स्वभाव अर्थ पर्याय<br/>(बिना किसी निमित्त के)"]
    C --> G["विभाव अर्थ पर्याय<br/>(अन्य के निमित्त से)"]

    D --> H["• सिद्ध पर्याय<br/>• अणु"]
    E --> I["• नर, नारकी पर्याय<br/>• स्कंध"]

    F --> J["• केवलज्ञान"]
    G --> K["• मति-श्रुत ज्ञान"]

Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer द्रव्य के आकार से रहना गुणों का संस्थान है अथवा कृष्ण, नील, शुक्ल आदि स्वरूप गुण हैं उन रूप से रहना गुणों का संस्थान है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer द्रव्य में भेद करने वाले धर्म को गुण कहते हैं ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



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Diksha Jain created this page on 13-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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