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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
जीवाश्च ॥ ३॥
Meaning
जीव भी द्रव्य है।

भावार्थ

यहाँ ‘जीवा:’ इस बहुवचन से जीवद्रव्य के अनेक भेद सूचित होते हैं। इनके सिवाय ३९ वें सूत्र में कालद्रव्य का भी कथन होगा। इसलिये इन सबको मिलाने पर जीवद्रव्य, पुद्गलद्रव्य, धर्मद्रव्य, अधर्मद्रव्य, आकाशद्रव्य और कालद्रव्य ये छह द्रव्य होते हैं। Reference:Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष Link to book

English Meaning:

The soul (jiva) are also are subtances (dravya) Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain



Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer जीवों की विविधता का सूचन करने के लिए ‘जीवा:’ बहुवचन किया है। संसारी और मुक्त जीव विविध प्रकार के हैं । संसारी जीव भी गति, इन्द्रिय आदि चौदह मार्गणास्थान, मिथ्यादृष्टि आदि चौदह गुणस्थान, सूक्ष्म-बादर आदि जीवस्थान की अपेक्षा विविध प्रकार के होते हैं। मुक्त जीव भी एक, दो, तीन, संख्यात, असंख्यात और अनन्त समय सिद्ध पर्याय के आश्रय से तथा मुक्ति-प्राप्ति के कारण- भूत शरीर के आकार की अनुविधायी स्वक्षेत्र – परक्षेत्र, अवगाहन आदि के भेद से अनेक प्रकार के हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf

Answer यद्यपि ‘द्रव्याणि जीवाः’ ऐसा एक योग करने पर ‘च’ शब्द नहीं होने के कारण लघु सूत्र तो होता परन्तु इससे जीवों का ही प्रसंग होता और ऐसा होने पर जीव ही द्रव्य कहे जा सकते, धर्मादि नहीं। अतः अनिष्ट का प्रसंग आता है ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-2-तत्त्वार्थ-मंजूषा-खंड-2-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji.pdf



Creative Credits:
Diksha Jain created this page on 11-feb-2026

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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