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Acharya Shri Umaswati
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भवनवासिनोऽसुरनागविद्धुत्सुपर्णाग्निवातस्तनितोदधिद्वीपदिक्कुमाराः ॥१०॥
सूत्रार्थ- भवनवासी देव दस प्रकार के हैं- असुरकुमार, नागकुमार, विद्युत्कुमार, सुपर्णकुमार, अग्निकुमार, वातकुमार, स्तनितकुमार, उदधिकुमार, द्वीपकुमार और दिक्कुमार ॥१०॥


भावार्थ

अर्थ: जो देव भवनों में निवास करते हैं, उन्हें भवनवासी कहते हैं। भवनवासी देव दस प्रकार के होते हैं– असुर कुमार, नाग कुमार, विद्युत्कुमार, सुपर्णकुमार, अग्निकुमार, वातकुमार, स्तनित कुमार, उदधि कुमार, द्वीप कुमार और दिक्कुमार।
Reference: TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

The subclasses of the residential (bhavanavāsī) deva are Asurakumāra, Nāgakumāra, Vidyutkumāra, Suparna- kumāra, Agnikumāra, Vātakumāra, Stanitakumāra, Udadhikumāra, Dvīpakumāra and Dikkumāra.
Reference: Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain


Questions and Answers: शङ्का -समाधान

समाधान: ये प्रथम तीन नरक पृथ्वियों तक जाकर नारकियों को उनके पूर्वभव सम्बन्धी बैर का स्मरण कराकर परस्पर लड़ाते हैं। (ये न केवल स्वयं नारकियों को मारते हैं अपितु सेवकों को भी उन्हें दण्डित कराते हैं।) क्रोधित हुए असुरकुमार एवं नागकुमार परस्पर की मात्सरता से एक दूसरे के प्रारम्भ किये हुए कार्यों में विघ्न करते हैं।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

उत्तर: पर्वत और चन्दनादि वृक्षों पर रहने वाले देव नागकुमार कहलाते हैं। ये और असुरकुमार परस्पर मस्तरता से एक-दूसरे के प्रारम्भ किये हुए कार्यों में विघ्न करते हैं। ये पाताल लोकवासी भवनवासी देव हैं, फण से उपलक्षित (भवनवासी देव) नाग कहलाते हैं।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji



Creative Credits:
Shashank Shaha created this page on – 12 February 2026.

Courtesy:
We are thankful to Sandesh Shah and Family -Pune (Uptech Engg) for sponsoring Tatvarthasutra Digitalization project



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