
Acharya Shri Umaswati
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Sutra
तिर्यक्-योनिजानां च ॥ ३९ ॥
Meaning
तिर्यंचों की उत्कृष्ट स्थिति तीन पल्योपम और जघन्य स्थिति अंतर्मुहूर्त्त प्रमाण है॥ ३९ ॥

भावार्थ
तिर्यञ्च तीन प्रकार के होते हैं- एकेन्द्रिय, विकलेन्द्रिय और पञ्चेन्द्रिय । एकेन्द्रियों में शुद्ध पृथिवीकायिक जीवों की आयु बारह हजार वर्ष होती है। खर पृथिवी काय की आयु बाईस हजार वर्ष होती है। जल कायिक जीवों की आयु सात हजार वर्ष, वायु कायिक की तीन हजार वर्ष और वनस्पति कायिक की दस हजार वर्ष उत्कृष्ट आयु होती है। अग्निकायिक की आयु तीन दिन रात होती है। विकलेन्द्रियों में, दो इंद्रियों की उत्कृष्ट आयु बारह वर्ष, तेइन्द्रियों की उनचास, रात दिन और चौइन्द्रियों की छह मास होती है। पञ्चन्द्रियों में जलचर जीवों की उत्कृष्ट आयु एक पूर्व कोटि, गोधा नकुल वगैरह की नौ पूर्वाङ्ग, सर्पों की बयालीस हजार वर्ष, पक्षियों की बहत्तर हजार वर्ष और चौपायों की तीन पल्य होती है । तथा सभी की जघन्य आयु एक अन्तमुहूर्त की होती है । ३९ ॥
English Meaning:
The lifetimes of subhuman beings – tiryańca – are the same. ‘Tiryagyoni’ is the seat-of-birth (yoni) of subhuman beings. It means the birth attained on the rise of name-karma (nāmakarma) of the subhuman (tiryańca) state of existence. Those born in the subhuman (tiryańca) yoni are tiryagyonija. The maximum lifetime of tiryagyonija is three palyopama, and minimum is antarmuhurta. Between these two extremes, there are many grades. Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
flowchart TD
A["मनुष्य एवं तिर्यञ्च आयु"]
A --> B["जघन्य"]
A --> C["उत्कृष्ट"]
B --> B1["अन्तमुहूर्त श्वास का 18वाँ भाग"]
C --> C1["3 पल्य (असंख्यात वर्ष) उत्कृष्ट भोगभूमिया"]
तिर्यञ्चों की आयु – विशेष
| जीव | उत्कृष्ट आयु | जीव | उत्कृष्ट आयु |
|---|---|---|---|
| मृदु (सूक्ष्म) पृथ्वीकायिक | 12000 वर्ष | तीन इन्द्रिय | 49 दिन |
| कठोर पृथ्वीकायिक | 22000 वर्ष | चार इन्द्रिय | 6 मास |
| जलकायिक | 7000 वर्ष | पञ्चेन्द्रिय जलचर | 1 कोटि पूर्व |
| वायुकायिक | 3000 वर्ष | रससिंधु से चल | 9 पूर्व |
| अग्निकायिक | 3 दिन | सर्प | 42000 वर्ष |
| वनस्पतिकायिक | 10000 वर्ष | पक्षी | 72000 वर्ष |
| दो इन्द्रिय | 12 वर्ष | चौपाये पशु | 3 पल्य |
Questions and Answers: शङ्का -समाधान
Answer तिर्यंच तीन प्रकार के होते हैं- (१) एकेन्द्रिय (२) विकलेन्द्रिय (३) पंचेन्द्रिय ।इनकी सामान्य से उत्कृष्ट स्थिति तीन पल्योपम प्रमाण एवं जघन्य स्थिति अंतर्मुहूर्त्त प्रमाण है। मध्यम विकल्प अनेक प्रकार के हैं।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
Answer एकेन्द्रिय जीवों में पृथ्वीकायिक जीव दो प्रकार के हैं- (१) खर पृथ्वीकायिक (२) शुद्ध पृथ्वीकायिक |खर पृथ्वीकायिक जीवों की उत्कृष्ट स्थिति बाईस हजार ( २२०००) वर्ष | शुद्ध पृथ्वीकायिक जीवों की – १२००० वर्ष जलकायिक जीवों की – ७००० वर्ष । अग्निकायिक जीवों की – ३ दिन-रात । वायुकायिक जीवों की – ३००० वर्ष । वनस्पतिकायिक जीवों की – १०००० वर्ष ।
Reference:Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
- Tatvarthsutra-in-Charts-&-Table-तत्वार्थसूत्र-_Smt-Pooja-Prakash-Chabda –Link
- Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain
- Tatvartha-Sutra-Pradeep-Bhaiya-Piyush-तत्वार्थसूत्र बा.ब्र.प्रदीप पियूष– Link to book
- TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री
- Tatvarth-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Acharya-Shri-Vasunandiji
- Tatvartha_Sutra_Muni_Sudhasagarji_तत्वार्थसूत्रमुनिसुधासागर_जी
- Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji
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