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Acharya Shri Umaswati
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Sutra
द्विगुण-द्विगुणा विस्तारा वर्षधर – वर्षा विदेहान्ताः ॥ २५॥
Meaning
(विदेहान्ता) विदेहक्षेत्र पर्यन्त के ( वर्षधरवर्षा) पर्वत और क्षेत्र (तद्विगुणद्विगुणाः) भरतक्षेत्र से दूने दूने विस्तार वाले (सन्ति) हैं॥ २५॥

भावार्थ

आगे के पर्वत और क्षेत्र विदेह क्षेत्र तक भरत क्षेत्र से दूने दूने विस्तार वाले हैं। अर्थात् हिमवान, पर्वत का विस्तार भरत क्षेत्र से दूना है । हिमवान् पर्वत के विस्तार से हैमवत क्षेत्र का विस्तार दूना है । हैमवत क्षेत्र के विस्तार से महाहिमवान् पर्वतका विस्तार दूना है। महाहिमवान् पर्वत से हरिक्षेत्र का विस्तार दूना है । हरि क्षेत्र के विस्तार से निषध पर्वत का विस्तार दूना है और निषध पर्वत से विदेह क्षेत्र का विस्तार दूना है Reference:TatvarthaSutra_KailashChand_Shastri_तत्वार्थसूत्र पंडित कैलाशचंद्र शास्त्री

English Meaning:

The mountains and the regions are double and double in width up to Videha.Those whose widths are double and double that of Bharata are meant. Whose widths are double and double? The widths of the mountains and the regions. Are all double in width? No. Up to Videha these are double of the preceding ones. What are the widths of the mountains and the regions in the north of Videha? Reference:Tatvartha-Sutra-तत्वार्थ-सूत्र-Vijay-K-Jain



Questions and Answers: शङ्का -समाधान

Answer हिमवन् कुलाचल का विस्तार एक हजार बावन योजन एवं एक योजन के उन्नीस भागों में से बारह (१०५२ १ऍयोजन) भाग प्रमाण है। हैमवत क्षेत्र का विस्तार दो हजार एक सौ पाँच योजन और एक योजन के उन्नीस भागों में से पाँच भाग (२१०५१९ योजन) प्रमाण है। महाहिमवन पर्वत का विस्तार चार हजार दो सौ दस योजन और एक योजन के उन्नीस भागों में से दस भाग (४२१० योजन) प्रमाण है । हरिक्षेत्र का विस्तार आठ हजार चार सौ इक्कीस योजन और एक योजन के उन्नीस भागों में से एक भाग (८४२१ १ योजन) प्रमाण है । निषध कुलाचल का विस्तार सोलह हजार आठ सौ ब्यालीस योजन और एक योजन के उन्नीस भागों में से दो भाग (१६८४२ १९ योजन) प्रमाण है विदेह क्षेत्र का विस्तार तैंतीस हजार छह सौ चौरासी योजन और एक योजन के उन्नीस भागों में से चार भाग प्रमाण है। (रा.वा. २) भरत क्षेत्र से चौगुना विस्तार हैमवत क्षेत्र का, हैमवत् क्षेत्र से चौगुना विस्तार हरि क्षेत्र का एवं हरिक्षेत्र से चौगुना विस्तार विदेह क्षेत्र का है। पूर्व पूर्व कुलाचल से आगे-आगे के कुलाचल चौगुने – चौगुने विस्तार वाले हैं।
Reference: Tatwarth-Manjusha-Khand-1-तत्वार्थ-मंजूषा-खंड-१-Aryika-Shri-Vigyanmati-Mataji

Answer
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Diksha Jain created this page on 6-feb-2026

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